महाराष्ट्र की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना (UBT) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है। अहीर को आदित्य ठाकरे के करीबी नेताओं में गिना जाता है, इसलिए उनके इस कदम को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

 

शिवसेना में शामिल होने के साथ ही सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल किया। सांसद श्रीकांत शिंदे ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अहीर आधिकारिक तौर पर पार्टी में शामिल हो चुके हैं और उन्हें उपसभापति चुनाव के लिए पार्टी का समर्थन प्राप्त है।

 

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शिंदे गुट ने बताया अनुभवी नेता का स्वागत

विधान भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य के मंत्री और शिवसेना नेता उदय सामंत ने कहा, 'सचिन अहीर वरिष्ठ MLC हैं और उन्होंने हमेशा मुंबई के लोगों की आवाज उठाई है। मुझे खुशी है कि इतने अनुभवी नेता शिवसेना के साथ आ रहे हैं। हमने इस फैसले से पहले सभी कानूनी पहलुओं की अच्छी तरह जांच की, उसके बाद ही यह निर्णय लिया गया।'

वहीं, शिवसेना (UBT) के नेता अंबादास दानवे ने बताया कि महाविकास आघाड़ी की ओर से MLC जगन्नाथ अभ्यंकर को विधान परिषद के उपसभापति पद का उम्मीदवार बनाया गया है।

2022 की बगावत के बाद बढ़ी सियासी हलचल

सचिन अहीर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी। इसके बाद वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में गए और फिर अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए। आदित्य ठाकरे के वर्ली से चुनाव लड़ने के दौरान उन्हें उनके करीबी नेताओं में माना जाता था।

 

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गौरतलब है कि 2022 में शिवसेना में हुई बगावत के बाद एकनाथ शिंदे बड़ी संख्या में विधायकों के साथ अलग हो गए थे। बाद में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न भी दे दिया। हाल ही में शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसद भी शिंदे गुट में शामिल हुए हैं। ऐसे में सचिन अहीर का दल बदलना उद्धव ठाकरे खेमे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।