बिहार के पूर्णिया जिले के जलालगढ़ में पुलिस ने दो हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया है। जलालगढ़ थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों को पकड़ा। इनके पास से पांच देसी कट्टा, 11 जिंदा कारतूस, एक खोखा और एक मोबाइल बरामद किया गया है। दोनों तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

 

पूर्णिया के वरीय पुलिस अधीक्षक शौर्य सुमन ने खुद इस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों इलाके में हथियार बेचने और सप्लाई करने का काम करते थे। पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और इनके अन्य साथियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

 

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घर से चार कट्टा और 11 कारतूस मिले

SSP ने बताया कि जलालगढ़ थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इलाके में कुछ अपराधी हथियार बेचने का काम कर रहे हैं। कुछ युवक गांव में घूम-घूमकर देसी कट्टा और कारतूस बेच रहे हैं। सूचना पुख्ता थी इसलिए तुरंत एक विशेष टीम बनाई गई और जलालगढ़ थानाध्यक्ष के नेतृत्व में छापेमारी की योजना बनाई गई। पुलिस टीम ने सबसे पहले सरसोनी गांव में नीरज कुमार के घर पर छापा मारा। पुलिस को देखते ही घर में अफरा-तफरी मच गई। तलाशी के दौरान पुलिस ने नीरज के घर से चार देसी कट्टा, 11 जिंदा कारतूस, एक खोखा और एक मोबाइल बरामद किया। चारों कट्टा अलग-अलग जगह छिपाकर रखे गए थे। कुछ बक्से में तो कुछ भूसे में छिपाकर रखे गए थे। 11 कारतूस भी एक पॉलिथीन में छिपाकर रखे गए थे। पुलिस ने तुरंत नीरज को गिरफ्तार कर लिया।

 

इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने दूसरी कार्रवाई जलालगढ़ थाना क्षेत्र के चक गांव में की। वहां से रमेश चौहान को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से एक देसी कट्टा बरामद किया गया। रमेश भी हथियार तस्करी के धंधे में शामिल था। वह नीरज के साथ मिलकर हथियार सप्लाई करता था। दोनों को थाने लाकर पूछताछ की गई जिसमें दोनों ने हथियार तस्करी की बात स्वीकार की।

हथियार सप्लाई का पूरा नेटवर्क खंगाल रही पुलिस

SSP ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी हथियार सप्लाई करने का काम करते हैं। ये लोग मुंगेर और अन्य जगहों से हथियार लाते हैं और पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार के इलाकों में अपराधियों को बेचते हैं। एक देसी कट्टा 8 से 10 हजार रुपए में बेचा जाता है और कारतूस 300 से 500 रुपए में। इनके ग्राहक ज्यादातर इलाके के छोटे-बड़े अपराधी, जमीन माफिया और कुछ युवक हैं जो हथियार लेकर घूमते हैं और दहशत फैलाते हैं।

 

SSP ने कहा कि दोनों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। इनके अन्य साथियों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। इस नेटवर्क में कई लोग शामिल हैं जो हथियार लाने, छिपाने और बेचने का काम करते हैं। पुलिस जल्द ही पूरे नेटवर्क का पता लगाने की बात कह रही है। उन्होंने कहा, 'जिले में हथियार तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।'

 

SSP ने यह भी कहा, 'इस छापेमारी अभियान में जो भी पुलिस अधिकारी और जवान शामिल थे उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। उनकी तत्परता और साहस से यह बड़ी सफलता मिली है। जलालगढ़ थानाध्यक्ष और उनकी टीम ने काफी मेहनत से यह कार्रवाई की है। पुलिस मुख्यालय से भी इन्हें इनाम देने की सिफारिश की जाएगी।'

 

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पूर्णिया में पुराना है हथियार तस्करी का नेटवर्क

पूर्णिया में हथियार तस्करी का नेटवर्क काफी पुराना है। पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज सीमांचल का इलाका है जहां हथियारों की मांग ज्यादा रहती है। मुंगेर को हथियारों की फैक्ट्री कहा जाता है। वहां से देसी कट्टा और पिस्टल बनकर सीमांचल के जिलों में सप्लाई किए जाते हैं। पूर्णिया पुलिस पहले भी कई बार हथियार तस्करों को गिरफ्तार कर चुकी है। पिछले तीन महीनों में पूर्णिया पुलिस ने 20 से ज्यादा देसी कट्टा और 50 से ज्यादा कारतूस बरामद किए हैं।

 

पुलिस सूत्रों के अनुसार, चुनाव से पहले हथियार तस्कर ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। पंचायत चुनाव नजदीक है इसलिए अपराधी हथियार जमा कर रहे हैं। इसी को देखते हुए पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। फिलहाल दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और पुलिस उनके मोबाइल कॉल डिटेल्स और अन्य संपर्कों की जांच कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से इलाके में हथियार तस्करी पर काफी हद तक रोक लगेगी और अपराधियों में डर पैदा होगा।