पटना जिले के बख्तियारपुर में झाड़ियों के बीच संचालित एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसटीएफ और बख्तियारपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो मोबाइल फोन पर ऑर्डर लेकर देसी कट्टे तैयार करता था और बनते ही उनकी डिलीवरी कर देता था। इस कार्रवाई में पिता-पुत्र समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश जारी है।

गुप्त सूचना ने खोली हथियार फैक्ट्री की पोल

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि बख्तियारपुर के टेकाबिगहा गांव स्थित टाल क्षेत्र में धोबा पुल के पास झाड़ियों के बीच अवैध हथियार बनाने का काम चल रहा है। सूचना मिलते ही एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त छापेमारी की। पुलिस टीम को देखते ही वहां मौजूद लोग भागने लगे, लेकिन घेराबंदी कर सभी को दबोच लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नालंदा जिले के चिकसौरा गांव निवासी विजय प्रसाद, धनंजय कुमार, सकलदीप प्रसाद और मिथिलेश बिंद के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक सकलदीप प्रसाद पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

 

यह भी पढ़ें: 'भजन करना था, इसलिए प्राइवेट पार्ट काट डाला', किसान ने उठाया खौफनाक कदम

मौके से मिला हथियार बनाने का पूरा सेटअप

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से तीन बेस मशीन, दो तैयार कट्टे, तीन अर्धनिर्मित हथियार, खंडा भाठी, हैंड ड्रिल मशीन, कारतूस के खोखे और कई अन्य उपकरण बरामद किए। बरामद सामान से साफ संकेत मिला कि यहां लंबे समय से हथियार निर्माण का संगठित कारोबार चल रहा था।

फोन पर ऑर्डर, तैयार होते ही डिलीवरी

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। ग्राहक फोन पर हथियार का ऑर्डर देते थे और उनकी मांग के अनुसार कट्टे तैयार किए जाते थे। पुलिस से बचने के लिए गिरोह तैयार हथियारों का स्टॉक नहीं रखता था। जैसे ही कट्टा बनकर तैयार होता, उसे तुरंत ग्राहक तक पहुंचा दिया जाता था। यही वजह थी कि अब तक यह नेटवर्क पुलिस की नजरों से बचा हुआ था।

हर दिन बनते थे 4 से 5 कट्टे

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह प्रतिदिन चार से पांच कट्टे तैयार करता था। एक कट्टे की कीमत 10 हजार से 15 हजार रुपये तक वसूली जाती थी। कीमत हथियार की गुणवत्ता, उसमें इस्तेमाल सामग्री और ग्राहक की आर्थिक क्षमता के आधार पर तय की जाती थी। गिरोह का नेटवर्क नालंदा, पटना, धनरूआ, बख्तियारपुर और आसपास के कई इलाकों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी कई लोग सामने आ सकते हैं।

पिता-पुत्र की भूमिका पर भी जांच

गिरफ्तार आरोपियों में पिता-पुत्र के शामिल होने से पुलिस की जांच और गहरी हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि परिवार आधारित इस नेटवर्क के तार लंबे समय से अवैध हथियार कारोबार से जुड़े हो सकते हैं।

 

यह भी पढ़ें: फर्जी हस्ताक्षर विवाद में अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, CID ने भेजा नोटिस

अब सरगना पर शिकंजा कसने की तैयारी

पुलिस फिलहाल गिरोह के मुख्य संचालक और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि हथियार बनाने के लिए कच्चा माल कहां से आता था और तैयार हथियार किन-किन जिलों में भेजे जाते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जल्द ही इस हथियार तस्करी नेटवर्क के कई और चेहरों का खुलासा हो सकता है।