उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। पढ़ाई और परिवार की आर्थिक परेशानियों के बोझ से जूझ रही एक पॉलिटेक्निक छात्रा ने हॉस्टल के कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा ने जान देने से पहले एक भावुक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने अपने माता-पिता से कहा कि अब उन्हें उसकी पढ़ाई और शादी की चिंता करने की जरूरत नहीं है। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है जबकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।
पुलिस को मौके से मिले सुसाइड नोट में छात्रा ने लिखा, 'मम्मी-पापा अब मेरी पढ़ाई और शादी को लेकर परेशान मत होना। अब आपको किसी बात की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।' इस नोट ने हर किसी को भावुक कर दिया। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि छात्रा परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर मानसिक दबाव में थी। हालांकि, पुलिस अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
15 दिन पहले ही रहने आई थी हॉस्टल
जानकारी के अनुसार, घाटमपुर क्षेत्र निवासी पूर्वा सचान पॉलिटेक्निक की छात्रा थी। वह पहले गांव से रोजाना कानपुर पढ़ने आती-जाती थी। परिवार की सहमति से करीब 15 दिन पहले ही वह काकादेव स्थित एक निजी हॉस्टल में रहने लगी थी, ताकि पढ़ाई पर बेहतर ध्यान दे सके। मंगलवार देर रात उसने अपने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
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घटना की जानकारी उस समय हुई जब हॉस्टल संचालिका ने छात्रा को कमरे में फंदे से लटका देखा। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच की। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।घटना की सूचना मिलते ही छात्रा के परिजन कानपुर पहुंचे। बेटी की मौत की खबर सुनकर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता ने बताया कि परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी पढ़ाई के साथ निजी कॉलेज में पढ़ाती है, जबकि पूर्वा तकनीकी शिक्षा हासिल कर अपने परिवार का सहारा बनना चाहती थी।
पुलिस का कहना है कि मौके से सुसाइड नोट बरामद हुआ है और उसे जांच का हिस्सा बनाया गया है। परिवार, हॉस्टल प्रबंधन और छात्रा से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बढ़ता मानसिक दबाव बना चिंता का विषय
यह घटना एक बार फिर छात्रों के बीच बढ़ते मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और भावनात्मक संघर्ष की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज को ऐसे संकेतों को गंभीरता से लेते हुए समय पर संवाद और सहयोग का माहौल तैयार करना चाहिए, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
