हरियाणा की बिजली वितरण कंपनियों के फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) की वसूली के नियमों में राहत देने की मांग से जुड़ी याचिका पर हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग गुरुवार को एक बार फिर सुनवाई करेगा। यह मामला न केवल हरियाणा के लाखों बिजली उपभोक्ताओं बल्कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के लिए भी अहम है। 

 

डिस्कॉम ने आयोग के समक्ष दायर अपनी याचिका में मल्टी ईयर टैरिफ (MYT) विनियम, 2024 के विनियम-68 में राहत देने का अनुरोध किया है। मौजूदा प्रावधान के मुताबिक ईंधन एवं बिजली खरीद की अतिरिक्त लागत की वसूली उपभोक्ताओं से मासिक आधार पर की जाती है। 

 

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क्या चाहते हैं बिजली वितरण निगम

निगमों का प्रस्ताव है कि इस अतिरिक्त राशि की वसूली मासिक आधार पर करने के बजाय आगामी वित्तीय वर्षों में 47 पैसे प्रति यूनिट की समान दर से की जाए, जिससे लागत की वसूली कैरिंग कॉस्ट (ब्याज लागत) सहित अधिक व्यवस्थित ढंग से की जा सके।

 

उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने इस मामले में सीधे निर्णय लेने के बजाय सार्वजनिक जनसुवाई की प्रक्रिया अपनाई। आयोग ने उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों से लिखित आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए और 14 मई को पंचकूला स्थित आयोग के कोर्ट रूम में सार्वजनिक जनसुनवाई भी आयोजित की।

आपत्तियों पर निगम ने नहीं दाखिल किया जवाब

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने आयोग के समक्ष कहा कि उनकी ओर से दायर आपत्तियों पर बिजली निगमों ने अब तक अपना जवाब उपलब्ध नहीं कराया है। इस पर आयोग ने इस मामले की सुनवाई आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। आवश्यक औपचारिकताओं के बाद आयोग ने मामले को गुरुवार के लिए दोबारा सूचीबद्ध किया।

 

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उपभोक्ता हितों पर किया जाएगा विचार

सुनवाई के दौरान आयोग यह विचार करेगा कि क्या डिस्कॉम द्वारा मांगी गई राहत उपभोक्ता हितों और नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप है। इस मामले का फैसला भविष्य में  फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) की वसूली की प्रक्रिया और बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।