दिल्ली की एक अदालत ने टिंडर ऐप के जरिए हुए 52.81 लाख रुपये की हाई-प्रोफाइल ठगी के मामले में मुख्य आरोपी दीपक वत्स को जमानत देने से इनकार कर दिया है। पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन्स जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने आरोपी की चालाकी और पुलिस की ढीली जांच पर कड़ी नाराजगी जताई। इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब कोर्ट ने साफ कहा कि ठगी की असली शिकार कोई और नहीं बल्कि हरियाणा की एक महिला न्यायिक अधिकारी हैं।
यह FIR दीक्षा देवी नाम की एक घर में काम करने वाली नौकरानी की शिकायत पर दर्ज की गई थी। जिसमें आरोप था कि डेटिंग ऐप के जरिए उसके साथ करीब 53 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है। हालांकि, जब कोर्ट ने डिजिटल मनी ट्रेल और बैंक खातों की पड़ताल की तो सच सामने आ गया। पता चला कि शिकायतकर्ता दीक्षा देवी असल में उसी महिला जज के घर पर काम करती हैं और सारे वित्तीय ट्रांजैक्शन सीधे जज साहिबा के खातों से किए गए थे।
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जज ने नौकरानी को क्यों बनाया मोहरा?
अदालत ने पाया कि पूरे फ्रॉड के दौरान शिकायतकर्ता नौकरानी के खाते से एक भी डिजिटल भुगतान नहीं हुआ था। हैरान करने वाली बात यह भी रही कि मामले में जो आखिरी 5 लाख रुपये कैश जमा किया गया था, वह भी महिला जज के कोर्ट के चपरासी ने जमा कराया था। कोर्ट ने कहा कि यह साफ है कि बदनामी के डर से खुद सामने आने के बजाय महिला जज ने अपनी नौकरानी को मोहरा बनाकर यह शिकायत दर्ज करवाई थी।
आरोपी दीपक वत्स ने कोर्ट में दावा किया कि महिला जज ने टिंडर ऐप पर 'Altruistic Joy' नाम से एक प्रोफाइल बनाई थी। जिसके बाद नवंबर 2025 से दोनों के बीच सहमति से रिश्ते में थे। आरोपी के मुताबिक, सारे पैसे उसकी गेमिंग और सट्टेबाजी आईडी में मर्जी से डाले गए थे। हालांकि, कोर्ट ने आरोपी द्वारा पेश चैट्स को एकतरफा पाया, जिसमें आरोपी के मैसेज गायब थे। अदालत ने इसे क्लासिक हनीट्रैप का मामला करार दिया।
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जज साहिबा पर उठे सवाल
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के जांच अधिकारी को कड़ी फटकार भी लगाई। फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने बिना ठीक से जांच-पड़ताल किए नौकरानी की बातों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लिया। अदालत ने महिला जज की स्थिति पर सहानुभूति जताई और कहा कि वह उनकी निजी और पेशेवर परेशानियों को समझती है लेकिन इसके कारण जांच की निष्पक्षता और सच्चाई से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला जज को खुद आगे आकर मजिस्ट्रेट या जांच अधिकारी के सामने पूरी सच्चाई बतानी चाहिए और अपना बयान दर्ज कराना चाहिए।
