हरियाणा में करीब एक लाख गर्भवती महिलाओं की डाइट के पैसे अटकने से स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ रही है। बजट रिलीज न होने से प्रदेश के सभी जिलों में इसका प्रभाव पड़ा है। करीब एक करोड़ रुपये का बजट अटकने से गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ा है। हालात ये हैं कि इसकी वजह से मातृ मृत्यु दर (MMR) पर भी प्रभाव पड़ रहा है। एक लाख जीवित जन्म पर प्रदेश में 85 मातृ मृत्यु दर्ज की जा रही है। जो कि चिंता का विषय है।

 

गर्भवती महिलाओं को समय पर पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाना प्रसव के दौरान उनकी देखभाल का अहम हिस्सा है। ऐसे में डाइट के भुगतान में देरी से इस सुविधा की निरंतरता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, भुगतान लंबित रहने और मातृ मृत्यु दर बढ़ने के बीच सीधे कारणात्मक संबंध की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच जरूरी है।

 

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डाइट भुगतान का समय पर निपटान जरूरी

प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए डाइट भुगतान का समय पर निपटान, प्रत्येक प्रसव केंद्र पर जरूरी सुविधाएं, गायनेकोलॉजिस्ट की उपलब्धता और रेफरल व्यवस्था को मजबूत करना अहम होगा। खासकर उन जिलों में जहां तत्काल सुधार की जरूरत है। जहां मातृ मृत्यु दर प्रदेश के औसत से कहीं ज्यादा दर्ज की गई है।

 

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चार जिलों के DC को चिट्ठी जारी

बता दें कि मातृ दर के आंकड़ों में कई जिलों का प्रदर्शन चिंताजनक है। फतेहाबाद में 100 से अधिक, भिवानी में 120 से अधिक, चरखी दादरी में 180 से अधिक तो जींद में 200 से अधिक है। ऐसे में सुधार को लेकर नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के MD डॉ. अरएस ढिल्लों ने इन चारों जिलों के DC को पत्र लिखकर खराब प्रदर्शन में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है।

 

हालांकि, मामले में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के MD डॉ. अरएस ढिल्लों का कहना है कि बजट रिलीज की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। खराब प्रदर्शन वाले जिलों में स्थिति में सुधार के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।