महाराष्ट्र के जाने-माने शिक्षाविद, समाजसेवी और पूर्व राज्यपाल पद्मश्री डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल (डीवाई पाटिल) का मंगलवार को कोल्हापुर में निधन हो गया। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे डॉ. डी वाई पाटिल ने बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शोक जताते हुए एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि डॉ. पाटिल के निधन से महाराष्ट्र ने एक दूरदर्शी नेता, महान शिक्षाविद और उदार मार्गदर्शक खो दिया है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और पाटिल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे।  

 

बुधवार सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। शाम 4 बजे कसबा बावड़ा स्थित 'यशवंत निवास' से उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनका अंतिम संस्कार कोल्हापुर के लाइन बाजार स्थित डॉ. डी. वाई. पाटील मेडिकल कॉलेज परिसर में किया जाएगा। 

 

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शिक्षा में अहम योगदान 

22 अक्टूबर 1935 को जन्मे डॉ. पाटिल ने अपना पूरा जीवन शिक्षा और समाज सेवा के लिए समर्पित किया। उनके निधन के साथ ही भारत के शिक्षा जगत का एक बड़ा अध्याय खत्म हो गया। उन्होंने मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कृषि और दूसरे प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई को लाखों छात्रों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने डी. वाई. पाटिल ग्रुप के तहत देशभर में 182 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थान, 7 डीम्ड यूनिवर्सिटी, इंटरनेशनल स्कूल और मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल स्थापित किए।

 

शिक्षा के अलावा उनका राजनीतिक जीवन भी काफी महत्वपूर्ण रहा। वह महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे और बाद में त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी बने। शिक्षा और समाज सेवा में उनके बड़े योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था।

कैसा रहा राजनीतिक करियर?

डॉ. डी. वाई. पाटिल का राजनीतिक करियर छह दशकों से अधिक लंबा रहा, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक दिग्गज नेता और कई राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कोल्हापुर नगर परिषद से की और बाद में वह महाराष्ट्र की पन्हाला विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने गए। कांग्रेस में लंबे समय तक कार्य करने के बाद उन्हें त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। 2018 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में प्रवेश किया था लेकिन वे सक्रिय राजनीति से दूर रहे।

 

कोल्हापुर के महापौर और महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य यानी विधायक रहते हुए उन्होंने आम जनता के हितों, न्याय और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाया। वह कांग्रेस के विधान परिषद दल के नेता विधायक सतेज पाटील और डी. वाई. पाटील समूह के प्रमुख संजय पाटिल के पिता थे, जबकि कोल्हापुर दक्षिण के पूर्व विधायक ऋतुराज पाटिल उनके पौत्र हैं।