मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने शनिवार को जालना जिले में भीषण गर्मी के बीच अपना नौवां अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया। जरांगे के इस अनशन से एक बार फिर से आरक्षण के मुद्दे पर राज्य की बीजेपी सरकार पर दबाव बढ़ गया। अंतरवाली सराटी गांव में आंदोलन शुरू होते ही मराठा आरक्षण मंत्रिमंडलीय उप-समिति के अध्यक्ष और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल वहां पहुंचे। पाटिल ने जरांगे से बातचीत करके उन्हें आंदोलन वापस लेने के लिए मनाने का प्रयास किया।
मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे ने भीषण गर्मी के बावजूद बिना किसी टेंट या छाया के खुले मैदान में अनशन शुरू किया है। जरांगे सरकार से बार-बार कहते रहे हैं कि वह मराठा समुदाय की 'अग्निपरीक्षा' न ले। उन्होंने यह भी संकल्प जताया कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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कुनबी जाति के लिए अपनी मांग दोहराई
मनोज जरांगे ने मराठा समुदाय के सदस्यों को ओबीसी आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की अपनी मांग दोहराई है। इसके अलावा उन्होंने हैदराबाद और सातारा गजट अभिलेख लागू करने तथा आरक्षण आंदोलन में भाग लेने वाले मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग की है।
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अलग मंत्रालय बनाने की मांग
उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए बने मंत्रालय की तर्ज पर मराठा समुदाय के लिए अलग मंत्रालय बनाने की मांग भी रखी है। आंदोलन शुरू होते ही विखे पाटिल मौके पर पहुंचे और जरांगे से छायादार शेड के नीचे बैठने का अनुरोध किया। उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार मुद्दे का समाधान निकालने के लिए प्रयास कर रही है।
