बिहार की सियासत में एक बार फिर तीखे बयान का दौर शुरू हो चुका है। विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखा और विवादित बयान दिया है, जिससे सियासी भूचाल आ गया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सहनी ने कहा कि अगर उन्हें एक हत्या की माफी मिल जाए तो वह सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मारेंगे। हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि वे संविधान और कानून में विश्वास रखने वाले नागरिक हैं और यह उनका गुस्सा है।

 

सहनी का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( SIR ) को लेकर सियासी बहस तेज है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगा रहा है। कांग्रेस ने बुधवार को पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला भी फूंका। अब मुकेश सहनी के इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है।

10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्ति

सहनी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए एक अखबार का हवाला दिया। इसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की है। रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

 

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मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी

सहनी ने कहा कि यह इस बात का सबूत है कि आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। जब दो चुनाव आयुक्त ही लिखित में आपत्ति दर्ज करा रहे हैं तो समझा जा सकता है कि आयोग कैसे काम कर रहा है। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है। गरीब, दलित, पिछड़े और निषाद समाज के लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। यह लोकतंत्र पर हमला है।

 

उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार की कठपुतली बन गए हैं। वे निष्पक्ष नहीं हैं।

PM मोदी पर भी साधा निशाना, कहा- चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा

मुकेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी चुनाव आयोग का दुरुपयोग कर रही है। बिहार में SIR के नाम पर वोट चोरी की तैयारी चल रही है।

 

सहनी ने 2029 के आम चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष सत्ता में आता है तो मौजूदा व्यवस्था से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी और ज्ञानेश कुमार जेल जाने वाले पहले लोगों में होंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना का दावा किया। सहनी ने कहा कि 2029 में जब इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी तो सबसे पहले उन लोगों पर कार्रवाई होगी जो संविधान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

 

सहनी ने कहा कि वे संविधान और कानून में विश्वास रखते हैं, इसलिए वे हिंसा का समर्थन नहीं करते, लेकिन उनका गुस्सा जायज है। चुनाव आयोग गरीबों का हक छीन रहा है। अगर एक गरीब का वोट कटेगा तो वह लोकतंत्र की हत्या है।

लिखित टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव सामान्य प्रक्रिया: चुनाव आयोग

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने भी सफाई दी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच आयोग की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, उसके सभी आधिकारिक निर्णयों को कानूनी मान्यता प्राप्त है और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के भीतर चर्चा होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। इसे मतभेद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

 

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आयोग ने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए SIR जरूरी है। इसमें किसी का भी नाम बिना वजह नहीं काटा जा रहा। जो लोग मृत हैं, डुप्लीकेट हैं या दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं, सिर्फ उनके नाम हटाए जा रहे हैं। विपक्ष बेवजह हंगामा कर रहा है।

भाजपा बोली- सहनी का बयान लोकतंत्र के लिए खतरा

मुकेश सहनी के गोली मारने वाले बयान पर भी सियासत गरमा गई है। भाजपा ने कहा कि यह बयान बेहद आपत्तिजनक और लोकतंत्र के लिए खतरा है। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को गोली मारने की बात कहना लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है। सहनी को माफी मांगनी चाहिए। भाजपा ने कहा कि सहनी सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं।

 

वहीं राजद ने सहनी के बयान का सीधे समर्थन तो नहीं किया, लेकिन कहा कि यह उनका गुस्सा है। सरकार और आयोग गरीबों के वोट काट रहे हैं, इसलिए लोगों में गुस्सा है। कांग्रेस ने भी कहा कि सहनी ने गुस्से में यह बात कही, लेकिन आयोग को अपनी कार्यप्रणाली पर विचार करना चाहिए।