अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में संगठनात्मक और प्रशासनिक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी बीच 19 और 20 जुलाई को दिल्ली में होने वाली विश्व हिंदू परिषद (VHP) की केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में न केवल ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था और चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद की रणनीति पर मंथन होगा, बल्कि पूर्व महासचिव चंपत राय के भविष्य, स्थायी महासचिव की नियुक्ति और ट्रस्ट की नई कार्यप्रणाली को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय की रूपरेखा तैयार की जा सकती है। इसके बाद 22 जुलाई को प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में इन फैसलों पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है। ऐसे में दिल्ली की बैठक को राम मंदिर ट्रस्ट के भविष्य की दिशा तय करने वाली सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में माना जा रहा है।

 

विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक पहले अयोध्या में प्रस्तावित थी लेकिन बाद में इसे दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। बैठक में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था, संगठनात्मक बदलाव और नई प्रबंधन व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा होगी। इस बार प्रतिनिधियों की संख्या भी सीमित कर दी गई है और करीब 150 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

 

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बजरंग लाल बांगड़ा का नाम सबसे आगे

चंपत राय के महासचिव पद से हटने के बाद फिलहाल कृष्ण मोहन को अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब स्थायी महासचिव के चयन को लेकर मंथन तेज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, बजरंग लाल बांगड़ा का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला विश्व हिंदू परिषद की बैठक और ट्रस्ट की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

 

बुधवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि पूर्व महासचिव चंपत राय से उनके आवास पर मिलने पहुंचे। दोनों के बीच करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। मुलाकात के बाद गोविंद देव गिरि बिना मीडिया से बातचीत किए वहां से निकल गए। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब एक दिन पहले चंपत राय ने पत्र जारी कर अपना पक्ष सार्वजनिक किया था और इस्तीफा स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

 

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22 जुलाई की बैठक पर टिकीं निगाहें

दिल्ली में होने वाले मंथन के बाद 22 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होगी। माना जा रहा है कि इसी बैठक में महासचिव पद, प्रशासनिक बदलाव और ट्रस्ट की नई कार्यप्रणाली को लेकर अंतिम निर्णय सामने आ सकते हैं। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद होने वाली यह पहली बड़ी संगठनात्मक कवायद है, इसलिए इस पर संत समाज, विश्व हिंदू परिषद और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।