लखनऊ। साइबर ठगी की रकम किसी बैंक खाते में पहुंचने के बाद अब पूरा बैंक खाता फ्रीज नहीं किया जाएगा। ठगी में जितनी रकम गई है, बैंक खाते में उतनी ही रकम को फ्रीज किया जाएगा। बाकी रकम का खाताधारक सामान्य रूप से इस्तेमाल कर सकेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई व्यवस्था से खाताधारकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद कई मामलों में बैंक पूरे खाते पर रोक लगा देते थे। इसका असर उन खाताधारकों पर पड़ता था, जिनका ठगी से कोई लेना-देना नहीं होता था। खाते में अपनी मेहनत की रकम होने के बावजूद लोग पैसे निकाल नहीं पाते थे और सामान्य लेनदेन भी बंद हो जाता था। पीड़ितों को साइबर क्राइम सेल और बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई मामलों में महीनों तक खाते अनफ्रीज नहीं हो पाते थे।
पांच हजार से अधिक लोगों के बैंक खाते फ्रीज
जनवरी से अब तक पांच हजार से अधिक लोगों के बैंक खाते फ्रीज किए जा चुके हैं। इनमें साइबर ठगी से जुड़े खातों के साथ ऐसे आम लोगों के खाते भी शामिल हैं, जिनके खातों में संदिग्ध रकम पहुंचने के बाद कार्रवाई की गई। साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर आलोक राय के मुताबिक, पुलिस शिकायत के आधार पर खाते पर रोक लगाने की कार्रवाई करती है। RBI की नई गाइडलाइन के बाद शिकायत मिलने पर पुलिस और बैंक के स्तर पर संबंधित रकम को लेकर कार्रवाई की जा रही है।
1930 पर करें साइबर ठगी की शिकायत
साइबर ठगी होने पर पीड़ित 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम पर कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है। साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई, आरबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं। वीडियो कॉल पर सामने बैठे रहने, गिरफ्तारी का डर दिखाने या रुपये भेजने का दबाव बनाया जाता है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत कॉल काट दें। किसी को ओटीपी, बैंक विवरण, पासवर्ड या निजी जानकारी साझा न करें और रुपये बिल्कुल न भेजें। भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसी धमकी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
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व्यापारियों ने खाते फ्रीज होने की परेशानी बताई
ट्रांस गोमती व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनिरुद्ध निगम ने कहा कि उनकी दुकान पर आने वाले करीब 70 प्रतिशत लोग ऑनलाइन भुगतान करते हैं। खाता फ्रीज होने के डर से लोग दो खाते खोलकर रखते हैं। नई व्यवस्था से व्यापारियों को राहत मिलेगी।लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि कई मामलों में ग्राहक सामान खरीदने और पेमेंट करने के बाद कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। बैंक की कार्रवाई के बाद कभी-कभी ग्राहक का खाता भी फ्रीज हो जाता है।लखनऊ व्यापार मंडल के महामंत्री मनजीत सिंह के मुताबिक, कुछ समय पहले एक होटल का खाता फ्रीज हुआ था। जांच में सामने आया कि सातवीं लेयर पर खाते में ठगी से जुड़ी रकम पहुंची थी और खाते में महज 200 रुपये थे। काफी मशक्कत के बाद खाता खुल पाया।
महीनों तक खाते के चक्कर लगाते रहे लोग
जापलिंग रोड निवासी मनीष सिंह के मुताबिक, एक युवक ने उनसे कहा कि वह ऑनलाइन रुपये भेज देगा और बदले में नकद ले लेगा। मनीष ने उसे नकद रुपये देकर ऑनलाइन भुगतान ले लिया। कुछ समय बाद शिकायत के आधार पर उनका पूरा बैंक खाता फ्रीज हो गया। हसनगंज थाने में शिकायत के बाद करीब दो महीने तक चक्कर लगाने पड़े और खाता अनफ्रीज नहीं हुआ।एक अन्य कारोबारी के मुताबिक, उसने दुकान के खाते में किसी व्यक्ति से महज 250 रुपये मंगाए थे। अगले दिन पूरा खाता फ्रीज हो गया। साइबर क्राइम सेल पहुंचने पर पता चला कि मुंबई से हुई शिकायत के आधार पर खाता फ्रीज किया गया था। करीब ढाई महीने तक बैंक और साइबर सेल के चक्कर लगाने के बाद खाता अनफ्रीज हुआ। इसके बाद ही वह दुकान के कर्मचारियों को वेतन दे सका।
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ठगी की रकम तक सीमित होगी कार्रवाई
नई व्यवस्था में बैंक और साइबर सेल के बीच समन्वय के जरिए ठगी से संबंधित रकम को ही फ्रीज करने पर जोर दिया जा रहा है। जांच में रकम से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने पर उसे रिलीज किया जा सकेगा। इससे उन खाताधारकों को राहत मिलेगी, जिनका साइबर ठगी से कोई सीधा संबंध नहीं होता, लेकिन किसी संदिग्ध लेनदेन के कारण उनका पूरा खाता फ्रीज कर दिया जाता था।
