कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें फिर से जोर पकड़ रही हैं। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के एन राजन्ना ने मंगलवार को कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया राहुल गांधी के कहने पर 'सत्ता त्यागने' या सीएम पद पर बने रहने दोनों के लिए तैयार हैं। सिद्धरमैया के करीबी माने जाने वाले राजन्ना ने पार्टी नेतृत्व में बदलाव के विचार का भी समर्थन किया। राजन्ना का यह बयान उपमुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष डी के शिवकुमार के दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।
शिवकुमार के समर्थक उन्हें काफी समय से मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। पूर्व मंत्री राजन्ना ने कांग्रेस आलाकमान से नेतृत्व के मुद्दे पर भ्रम दूर करने का आग्रह किया और साथ ही सचेत किया कि अनिश्चितता जारी रहना पार्टी और शासन, दोनों के लिए नुकसानदेह साबित होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर मुख्यमंत्री बदला जाता है तो कर्नाटक में दलित मुख्यमंत्री होना चाहिए।
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राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज
राजन्ना ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजों और कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। चार मई को इन राज्यों के नतीजे घोषित होने के बाद नेतृत्व परिवर्तन और मंत्रिमंडल फेरबदल पर संभावित फैसले को लेकर पार्टी और राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं।
सभी मंत्रियों ने सहमति जताई
राजन्ना ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की अपने करीबी कैबिनेट सहयोगियों और विधायकों के साथ हाल में हुई चर्चा के बारे में पूछे जाने पर कहा, 'मुख्यमंत्री ने खुले मन से कहा है कि वह आलाकमान और राहुल गांधी के निर्देशों का पालन करेंगे तथा सभी को सहयोग करना चाहिए। सभी मंत्रियों ने इस पर सहमति जताई है।'
'राहुल गांधी के फैसले का पालन करेंगे'
उन्होंने कहा, 'किसी भी नेता के लिए सत्ता स्थायी नहीं होती। जो सत्ता खो देते हैं, वे उसे पाने की कोशिश करेंगे और जिन्हें सत्ता मिलती है, वे उसे बनाए रखने की कोशिश करेंगे। मुख्यमंत्री की सोच यह है कि वह राहुल गांधी के निर्देशों के अनुसार सत्ता का त्याग करने या सत्ता में बने रहने- दोनों के लिए तैयार हैं। वह राहुल गांधी के फैसले का पालन करेंगे।'
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राजन्ना ने सिद्धरमैया के बाद कोई दलित मुख्यमंत्री बनाए जाने संबंधी उनके पुराने बयान के बारे में पूछे जाने पर कहा, 'इसमें गलत क्या है? मैं अपने इस बयान पर कायम हूं कि दलित मुख्यमंत्री होना चाहिए।' यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी अध्यक्ष भी बदला जाना चाहिए, पूर्व मंत्री ने कहा कि सब कुछ बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि अगर मंत्रियों को बदला जाना है, तो पार्टी अध्यक्ष क्यों नहीं? सब कुछ आलाकमान तय करेगा। उन्होंने कहा, 'मैं यह भी आग्रह करता हूं कि आलाकमान को भ्रम को दूर करना चाहिए। जब तक भ्रम बना रहेगा, यह पार्टी और शासन के लिए नुकसानदेह होगा। मैं भी चार मई के बाद दिल्ली जाऊंगा।'
