उत्तर प्रदेश के पीलीभीत की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पाई गई, जिसको लेकर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया। चुनाव आयोग ने 2 सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) को नौकरी से सस्पेंड करने का निर्देश दिया। दोनों एसडीएम के साथ-साथ वोटर रजिस्ट्रेशन केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पीलीभीत जिले की चार विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट का दोबारा सत्यापन करने का निर्देश दिया, जिसकी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजनी होगी।

 

चुनाव आयोग ने रविवार को दो एसडीएम को सस्पेंड करने का आदेश दिया। जिसके मुताबिक, पीलीभीत के एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को नौकरी से सस्पेंड किया गया। इनके अलावा वोटर रजिस्ट्रेशन केंद्र में काम करने वाले ऑपरेटर अनिल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। जिसके बाद पुलिस इस मामले की जांच-पड़ताल कर रही है।

 

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वोटर लिस्ट में क्या गड़बड़ी हुई?

चुनाव आयोग की जांच-पड़ताल में पाया गया कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में 31 मई से लेकर 29 अगस्त के बीच वोटर्स ने अपनी डिटेल्स में संशोधन के लिए फॉर्म 8 भरा था। यह फॉर्म भरने वाले कुल 13,779 लोग थे। जिनमें से 10,470 लोगों के आवेदन को मंजूर किया गया, जबकि 3,309 लोगों के आवेदन को मंजूर नहीं किया गया। जब चुनाव आयोग ने लोगों के फॉर्म की जांच-पड़ताल करना चाहा, तो पता चला कि फॉर्म और वोटर्स के कागजात कार्यालय में नहीं है।

 

इस गैर-जिम्मेदारी को देखते हुए चुनाव आयोग ने दोनों एसडीएम अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया। इस मामले की आगे की कार्रवाई जारी है। अब जिले की चार विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट का दोबारा सत्यापन होगा।

 

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गड़बड़ी का खुलासा कांग्रेस ने किया

कुछ दिनों पहले कांग्रेस के नेताओं ने पीलीभीत जिले की वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाया था। नेताओं ने दावा किया कि 13 हजार से ज्यादा वोटरों के एपिक नंबर पुराने थे लेकिन नाम बदल दिया गया। इसके साथ ही नेताओं ने आरोप लगाया कि मुस्लिम वोटरों की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की गई। इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने जांच-पड़ताल की थी।