इन दिनों देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चर्चा हो रही है। सरकार देश भर में E20 पेट्रोल लागू कर चुकी है। देश के सभी पेट्रोल पंपो पर यह पेट्रोल मिल रहा है। सरकार से सुरक्षित और बेहतर बता रही है। वहीं, लोगों का कहना है कि इससे उनकी गाड़ियों में दिक्कते आ रही हैं। कई लोग दावा कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल  के कारण उनकी गाड़ी का माइलेज कम हुआ है। हाल ही में यूट्यूबर सौरव जोशी ने भी इसी तरह की शिकायत की थी, जिसके बाद मर्सिडिज बेंज ने खुद ट्वीट कर मामले में स्पष्टीकरण दिया था कि माइलेज कई कारणों से कम हो सकती है। 

 

माइलेज कम क्यों हो रहा है यह जानने से पहले माइलेज को समझना जरूरी है। माइलेज का मतलब है कि आपकी गाड़ी 1 लीटर ईंधन (पेट्रोल या डीजल) में कितनी दूरी तय करती है। इसे आमतौर पर किलोमीटर प्रति लीटर (kmpl) में मापा जाता है। अगर कोई कार 1 लीटर पेट्रोल में 18 किलोमीटर चलती है, तो उसका माइलेज 18 kmpl माना जाएगा। जितनी अधिक माइलेज होगी, उतना ही कम ईंधन खर्च होगा और गाड़ी चलाने का खर्च उतना ही कम आएगा। लोग गाड़ी खरीदते समय माइलेज का ध्यान रखते हैं लेकिन कई लोगों को बढ़ी हुई माइलेज परेशान करती है। 

 

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किन कारणों से बढ़ती है माइलेज?

इन दिनों माइलेज बढ़ने का सबसे बड़ा कारण लोग E20 पेट्रोल को बता रहे हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि इससे माइलेज पर कोई असर नहीं पड़ता। कार बनाने वाली कंपनियां भी दावा कर रही हैं कि उनकी गाड़ियों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में लोग जानना चाह रहे हैं कि गाड़ी की माइलजे कम किन कारणों से हो सकती है। माइलेज ड्राइविंग का तरीका, सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, वाहन की सर्विसिंग और इंजन की स्थिति जैसी कई बातों पर निर्भर करती है। 

 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आपकी कार पहले एक लीटर पेट्रोल में 16-18 किलोमीटर चलती थी और अब 10-12 किलोमीटर का ही माइलेज दे रही है, तो इसे सामान्य बात मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऑटो एक्सपर्ट्स के मुताबिक, माइलेज कम होने के पीछे केवल पेट्रोल ही जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, टायर, इंजन और सर्विसिंग जैसी कई वजहें भी हो सकती हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें से कई समस्याओं को समय रहते ठीक कर लिया जाए तो माइलेज दोबारा बेहतर हो सकता है। 

इन कारणों से कम हो सकती है माइलेज

  • अगर कार के टायर में तय मानक से कम हवा है तो इंजन को गाड़ी चलाने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। कई बार सिर्फ टायर में सही हवा भरवाने से ही माइलेज में सुधार देखने को मिलता है। 
  • अगर आप हर बार तेजी से एक्सीलरेट करते हैं या अचानक ब्रेक लगाते हैं, तो इंजन ज्यादा ईंधन खर्च करता है। शहर के ट्रैफिक में ऐसी ड्राइविंग का असर माइलेज पर सबसे ज्यादा पड़ता है।
  • इंजन को सही मात्रा में हवा नहीं मिलने पर ईंधन पूरी तरह नहीं जल पाता। गंदा या जाम एयर फिल्टर इंजन पर असर डालता है, जिससे पेट्रोल की खपत बढ़ जाती है।
  • स्पार्क प्लग और ऑक्सीजन सेंसर में खराबी आने पर इंजन जरूरत से ज्यादा पेट्रोल जला सकता है, जिससे माइलेज प्रभावित होता है। 
  • अगर कार का व्हील अलाइनमेंट सही नहीं है तो गाड़ी चलाने में एक्ट्स्ट्रा गतिरोध पैदा हो सकता है। इसका सीधा असर माइलेज पर पड़ता है और टायर भी जल्दी घिसने लगते हैं। 
  • कार में हमेशा भारी सामान रखना या रूफ कैरियर पर एक्स्ट्रा वजन ले जाने से इंजन पर दबाव बढ़ जाता है जिससे माइलेज कम हो जाती है। 
  • अगर ईंधन की गुणवत्ता अच्छी नहीं है तो इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक खराब गुणवत्ता वाले ईंधन का इस्तेमाल फ्यूल सिस्टम पर भी असर डाल सकता है।
  • इंजन ऑयल, फिल्टर और दूसरे जरूरी पार्ट्स समय पर नहीं बदलने से इंजन की क्षमता कम होने लगती है। इसका असर सीधे माइलेज पर दिखाई देता है।

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मैकेनिक के पास जाना चाहिए?

अगर माइलेज अचानक बहुत ज्यादा गिर जाए, इंजन से बहुत ज्यादा आवाज आने लगे, गाड़ी में चेक इंजन लाइट जलने लगे, कार की पर्फॉर्मेंस पहले से खराब हो जाए, तो बिना देर किए सर्विस सेटंर में जाना चाहिए। कई बार समय रहते इस तरह की दिक्कत को ठीक करके बड़ी प्रॉब्लम से बचा जा सकता है।