पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ने बहुत असर डाला है। लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर हुए हैं तो कुछ ऐसे लोगों के नाम भी लिस्ट में वापस आए हैं जिन्हें एक समय पर बांग्लादेशी बता दिया गया था। ऐसे ही एक शख्स मीनारुल शेख का कहना है कि अभी तक वह उन्होंने विकास के मुद्दों के लिए वोट दिया लेकिन इस बार वह अपनी नागरिकता साबित करने के लिए वोट डालेंगे। एक समय पर महाराष्ट्र से गिरफ्तार गए 6 लोगों को बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया गया। बाद में वे भारत लौटे और उनका नाम वोटर लिस्ट में भी है इन 6 लोगों में एक नाम मीनारुल शेख का भी है।
मीनारुल शेख के लिए वर्षों तक चुनाव का मतलब सड़क, रोजगार और राशन जैसे मुद्दे और बेहतरी के लिए बदलाव की उम्मीद से था लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मायने उनके लिए पहले जैसे नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में अपने कच्चे घर के बाहर हाथ में दस्तावेजों से भरी प्लास्टिक की फाइल थामे खड़े 34 वर्षीय मीनारुल ने कहा कि इस बार वह सिर्फ वोट डालने मतदान केंद्र नहीं जाएंगे, बल्कि उनसे छीन लिए गए अधिकार यानी भारतीय होने का हक वापस लेने जाएंगे। आठ महीने, चार सुनवाइयों और प्रखंड कार्यालय के कई चक्कर लगाने के बाद वापस मिली अपनी मतदाता पर्ची हाथ में लिए मीनारुल शेख ने कहा, ‘पिछले साल उन्होंने मुझे दूसरे देश में फेंक दिया था और कहा था कि मैं भारतीय नहीं हूं। यह वोट ही मेरा जवाब है।’
बांग्लादेश भेज गए थे 6 लोग
मीनारुल मुर्शिदाबाद के उन छह प्रवासी मजदूरों में शामिल हैं जिन्हें पिछले साल जून में महाराष्ट्र में पकड़ा गया, बांग्लादेशी करार दिया गया, सीमा पार भगा दिया गया और कुछ समय के लिए बांग्लादेश में रखा गया। बाद में पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनकी नागरिकता साबित की जिसके बाद उन्हें वापस लाया गया। संशोधित वोटर लिस्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद जिले से 7.48 लाख नाम हटाए गए हैं, जिससे उन गांवों में आशंका का माहौल है और कई प्रवासी परिवारों को डर है कि उनके साथ बाहरी लोगों जैसा व्यवहार किया जाएगा।
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हरिहरपाड़ा के 36 वर्षीय महबूब शेख ने कहा, ‘मैं चावल, पैसे या वादों के लिए वोट नहीं कर रहा। मैं यह दिखाने के लिए वोट दे रहा हूं कि मैं भारतीय हूं और कोई मुझे फिर से बाहर नहीं फेंक सकता।’ उनके पास बैठीं परिवार की एक महिला सदस्य यह कहते हुए रो पड़ीं कि जब महबूब को ले जाया गया, तब हमें लगा कि पता नहीं हम उन्हें दोबारा देख पाएंगे या नहीं। वह कहती हैं, 'मैं वोट देना चाहती हूं ताकि फिर कोई हम पर सवाल न उठा सके।’ हरिहरपाड़ा के नाजिमुद्दीन मंडल ने वे 300 बांग्लादेशी टका अब भी अपने पास रखे हैं जो उन्हें सीमा पार भेजे जाने से पहले दिए गए थे।
बांग्लादेशी टका बचाकर क्यों रखा है?
उन्होंने कहा, ‘मैंने इसे सबूत के तौर पर संभालकर रखा है। जब भी मैं खुद को कमजोर महसूस करता हूं, इसे देखता हूं और खुद को याद दिलाता हूं कि मेरे साथ क्या हुआ था।’ इन छह लोगों में शामिल एक अन्य व्यक्ति शमीम खान ने कहा कि आगामी चुनाव को लेकर उनमें उत्साह से ज्यादा गुस्सा भरा है। उन्होंने कहा, ‘पहले हम इस आधार पर वोट देते थे कि कौन सड़क बनाएगा या काम देगा। अब हम अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए वोट दे रहे हैं।’ उनकी मां रुकसाना बेगम ने कहा कि उनके परिवार को अब भी वह रात याद है, जब पुलिस महाराष्ट्र में उनके कमरे में कथित रूप से जबरन घुस गई थी।
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बांग्लादेश के एक डिटेंशन सेंटर में दो दिन बिताने वाले निजामुद्दीन शेख ने कहा कि उन्होंने अब काम के लिए पश्चिम बंगाल से बाहर जाना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा, 'मैं सोचता था कि गरीबी सबसे बड़ी समस्या है। अब मुझे पता है कि अपनी पहचान खो देना उससे भी बुरा है।' एक अन्य मजदूर जमालुद्दीन शेख ने कहा कि उन्होंने 18 साल का होने के बाद से हर चुनाव में वोट डाला है लेकिन यह पहली बार होगा जब वह अपने सारे दस्तावेज साथ लेकर मतदान केंद्र जाएंगे। उन्होंने कहा, 'मेरे पिता ने वोट दिया, मेरे दादा ने वोट दिया। फिर भी मुझसे भारतीय होने का सबूत मांगा गया। यह चुनाव किसी दल को चुनने के बारे में नहीं है। यह चुनाव हमारा अस्तित्व साबित करने के बारे में है।'
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अबू ताहेर ने आरोप लगाया कि यह घटना दिखाती है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकारें बांग्ला बोलने वाले मुसलमानों को संदेह की नजर से देखती हैं। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस मामले ने संस्थाओं के ढहने को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा, 'जब वास्तविक नागरिकों को कतार में खड़ा होकर यह साबित करना पड़े कि वे भारतीय हैं, तब स्वयं लोकतंत्र ही कसौटी पर होता है।’ बीजेपी ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि बंगाल में घुसपैठ अब भी एक बड़ी चिंता है और किसी वास्तविक नागरिक को परेशान नहीं किया जाएगा। मीनारुल ने कहा, ‘पहले मैं सोचता था कि मेरा वोट मात्र एक वोट है। अब मुझे लगता है कि यह इस बात का सबूत है कि यह देश मेरा है।’
(न्यूज एजेंसी भाषा से इनपुट के आधार पर)
