उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक बार फिर से चुनावी मोड में हैं। 2012 के चुनाव से पहले साइकिल चलाने वाले अखिलेश यादव ने सरकार में आने के बाद भी साइकिल वालों का ध्यान रखा था। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों में सड़क के किनारे साइकिल चलाने के लिए अलग से ट्रैक बनाए गए थे। लगभग एक दशक बीत चुके हैं और अब इन साइकिल ट्रैक के निशान ही बाकी हैं। गौतम बुद्ध नगर जिले के नोएडा में बने साइकिल ट्रैक की मौजूदा स्थिति ऐसी है कि साइकिल चलाने वाले चाहकर भी सड़क पर चलने को मजबूर हैं।
एक रोचक संयोग यह भी है कि 2012 के चुनाव से पहले साइकिल चलाने वाले अखिलेश यादव भी पिछले दो चुनाव से साइकल के बजाय बस यात्रा कर रहे हैं।
कई जगहों पर साइकिल ट्रैक बचा ही नहीं है और जहां है वहां दिन में पार्किंग बन जाती है। इतना ही नहीं, कई जगहों पर तो दिन ठेले और दुकानें भी लग जाती हैं। इसी के रिएलिटी चेक में पता चला है कि नोएडा के साइकिल ट्रैक अब साइकिल चलाने को छोड़कर बाकी के कामों में ही इस्तेमाल हो रहे हैं।
नोएडा शहर में लगभग 97 किलोमीटर लंबाई वाले साइकिल ट्रैक बनाए गए हैं लेकिन ज्यादातर जगहों पर ये अतिक्रमण का शिकार हैं। सबसे बिजी माने जाने वाले रास्ते यानी सेक्टर-16 से सेक्टर-12/22 के बीच बने साइकिल ट्रैक पर भी हमने यही पाया।
क्या था साइकिल ट्रैक का मकसद?
साल 2012 में सत्ता में आई समाजवादी पार्टी (सपा) के शासनकाल में वर्ष 2014-15 में इन ट्रैक को शुरू किया गया था। नोएडा में एमपी वन-मास्टर प्लान रोड नंबर-1 पर रजनीगंधा चौराहे से सेक्टर-57, सेक्टर-62 से 71 और सेक्टर-44 में ट्रैक तैयार किए गए हैं। इन तीनों जगहों को मिलाकर करीब 42 किलोमीटर लंबे ट्रैक है। इसको बनाने में नोएडा प्राधिकरण ने करीब 40 करोड़ खर्च किए थे।
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अप्रैल 2015 में नोएडा के विकास कार्यों के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने करीब 50 किलोमीटर लंबे साइकिल ट्रैक समेत 62 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी। उस समय उन्होंने कहा था कि सरकार का उद्देश्य नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे को 24 घंटे सक्रिय रहने वाला ग्लोबल सिटी के रूप में विकसित करना है। उनका कहना था कि इन साइकिल ट्रैकों का निर्माण पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण कम करने और जनस्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि बढ़ते प्रदूषण के बीच लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन के लिए प्रेरित किया जा सके।
नोएडा में लोगों को साइकिल चलाने के लिए अलग और सुरक्षित रास्ता देने के मकसद से साइकिल ट्रैक बनाया गया है लेकिन सेक्टर 16 से सेक्टर 12/22 की तरफ जाने वाले रास्ते पर इसकी जमीनी तस्वीर कुछ अलग नजर आती है। यहां मुख्य सड़क पर साइकिल सवार लगातार आते-जाते दिखाई देते हैं लेकिन उनके लिए बनाए गए साइकिल ट्रैक का इस्तेमाल होता हुआ कम ही नजर आया।
इसकी वजह जानने के लिए हमने करीब एक घंटे तक मौके पर रहकर रास्ते और साइकिल ट्रैक की स्थिति को देखा। इस दौरान मुख्य सड़क से कई साइकिल सवार गुजरते दिखाई दिए लेकिन वे साइकिल ट्रैक पर जाने के बजाय मुख्य सड़क से ही आगे बढ़ते रहे। वहीं, ट्रैक के कई हिस्सों में बाइक और कारें खड़ी मिलीं। कुछ जगहों पर ट्रैक की चौड़ाई भी कम होती दिखाई दी जबकि कुछ हिस्सों में इसकी कनेक्टिविटी को लेकर भी सवाल नजर आए।
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मौके पर आने-जाने वाले लोगों से बातचीत में साइकिल ट्रैक के इस्तेमाल न होने की कई वजहें सामने आईं। लोगों ने पार्किंग, ट्रैक की बनावट और जगह-जगह रास्ता खत्म होने जैसी समस्याओं का जिक्र किया।
सड़क पर साइकिल, ट्रैक पर पार्किंग
मौके पर साइकिल ट्रैक के कई हिस्सों में बाइक और कारें खड़ी दिखाई दीं। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि ट्रैक के आसपास पार्किंग की वजह से रास्ता कई जगह बाधित रहता है। ऐसे में साइकिल से आने-जाने वाले लोग ट्रैक का इस्तेमाल करने के बजाय मुख्य सड़क से जाना ज्यादा आसान समझते हैं।
मुख्य सड़क से साइकिल लेकर जा रहे घनश्याम मिश्र ने बताया कि वह करीब दो साल से इस रास्ते से आ-जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइकिल ट्रैक पर अक्सर बाइक और कारें खड़ी रहती हैं, जिसकी वजह से वह इसका इस्तेमाल नहीं करते।
साइकिल ट्रैक पर गाड़ियों की पार्किंग
खबरगांव से बातचीत में घनश्याम मिश्र कहते हैं, ‘इस ट्रैक पर पार्किंग हुई रहती है। कभी बाइक तो कभी कार खड़ी रहती है। ऐसे में हम इस ट्रैक पर कैसे आएं?’ उनका कहना है कि पार्किंग के अलावा ट्रैक की कनेक्टिविटी भी एक समस्या है। कुछ दूर जाने के बाद यह ट्रैक मुख्य सड़क पर ही मिल जाता है।
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कुछ दूर चलने के बाद बदल जाती है ट्रैक की तस्वीर
साइकिल ट्रैक की समस्या सिर्फ पार्किंग तक ही सीमित नहीं है। मौके पर लोगों ने इसकी बनावट और चौड़ाई को लेकर भी सवाल उठाए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ दूरी तक ट्रैक ठीक दिखाई देता है लेकिन आगे बढ़ने पर एक बड़े नाले के ढका हुआ हिस्से के पास इसकी जगह काफी कम हो जाती है। नाला ढका हुआ है लेकिन उसके बाद साइकिल ट्रैक का हिस्सा संकरा दिखाई देता है। आगे कुछ जगहों पर रास्ता लगातार नहीं रहता और साइकिल सवार को मुख्य सड़क की तरफ जाना पड़ता है।
नाले की वजह से संकरा हुआ साइकिल ट्रैक
घनश्याम मिश्र ने भी ट्रैक की इसी समस्या की ओर इशारा किया। उनका कहना है कि अगर ट्रैक को ठीक तरीके से बनाया जाए और रास्ता लगातार मिले तो वह इसका इस्तेमाल जरूर करेंगे। उन्होंने कहा, ‘अगर ट्रैक ठीक हो जाएगा तो हम क्यों नहीं इस्तेमाल करेंगे। इससे हमें ज्यादा सुरक्षित महसूस होगा, जाने की सुविधा रहेगी और हम जाम में भी नहीं फंसेंगे।’
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जमीनी हकीकत क्या कहती है?
साइकिल ट्रैक के इस्तेमाल को समझने के लिए हमने करीब एक घंटे तक मौके पर रहकर स्थिति को देखा। इस दौरान सेक्टर 16 से सेक्टर 12/22 की तरफ जाने वाली मुख्य सड़क पर लगातार साइकिल सवार आते-जाते दिखाई दिए। यानी इस रास्ते से साइकिल से सफर करने वाले लोग मौजूद हैं लेकिन वे उनके लिए बनाए गए अलग ट्रैक का इस्तेमाल करते नजर नहीं आए।
दूसरी तरफ, साइकिल ट्रैक के अलग-अलग हिस्सों में पार्किंग दिखाई दी। कई जगह बाइक खड़ी मिलीं जबकि कुछ जगहों पर लोग बाइक लेकर ट्रैक की तरफ से गलत दिशा में आते-जाते भी दिखाई दिए। यह स्थिति एक सवाल खड़ा करती है कि जब इस रास्ते से साइकिल सवार गुजर रहे हैं तो आखिर वे साइकिल ट्रैक का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहे?
कहीं रास्ता बंद, तो कहीं गलत दिशा में बाइक
मौके पर मौजूद लोगों ने साइकिल ट्रैक की कनेक्टिविटी को भी बड़ी समस्या बताया। एक व्यक्ति के मुताबिक, ट्रैक कुछ दूरी तक जाने के बाद कई जगह मुख्य सड़क में मिल जाता है। ऐसे में साइकिल सवार के पास दोबारा मुख्य सड़क पर आने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि जहां ट्रैक पार्किंग की वजह से बाधित रहता है, वहां साइकिल सवारों के लिए इसका इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।
वहीं, मौके पर यह भी देखने को मिला कि कुछ बाइक सवार मुख्य सड़क पर जाने के बजाय साइकिल ट्रैक की तरफ से गलत दिशा में आते-जाते हैं। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या जिस रास्ते को साइकिल सवारों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाया गया था, उसका इस्तेमाल दूसरे वाहनों के लिए भी होने लगा है?
दुकानदार ने क्या बताया?
मौके पर झाल-मुड़ी बेचने वाले एक दुकानदार से भी हमने साइकिल ट्रैक को लेकर बात की। दुकानदार ने बताया कि वह यहां लंबे समय से दुकान लगा रहा है और उसने साइकिल ट्रैक का इस्तेमाल साइकिल सवारों द्वारा बहुत कम देखा है। उसके मुताबिक, कुछ लोग इस रास्ते का इस्तेमाल बाइक ले जाने या कार पार्किंग के लिए जरूर करते हैं।
दुकानदार ने कहा, ‘मैं यहां काफी दिनों से दुकान लगा रहा हूं। मैंने इस रास्ते पर साइकिल ट्रैक का इस्तेमाल साइकिल वालों को बहुत कम करते देखा है। कई बार लोग बाइक या कार पार्किंग के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।’
अथॉरिटी के दफ्तर पास ही साइकिल ट्रैक पर कब्जा
नोएडा अथॉरिटी का नया दफ्तर सेक्टर 96 में खुला है। इस दफ्तर के दोनों तरफ भी साइकिल ट्रैक है। इस दफ्तर की बाईं ओर कुछ सौ मीटर तक तो साइकिल ट्रैक है ही नहीं। फिर जहां से यह ट्रैक शुरू होता है, वहां से इस पर एंट्री करने का रास्ता बंदा है।
नोएडा सेक्टर-98 से की ओर जाने वाले रास्ते पर बना साइकिल ट्रैक भी बदहाल नजर आता है। इस रास्ते पर Sky Mark One और Sikka जैसी कॉमर्शियल बिल्डिंग्स हैं। इन बिल्डिंग्स के नीचे और आसपास का साइकिल ट्रैक काफी हद तक पार्किंग में बदल गया है। यहां काम करने वाले कर्मचारी अपने वाहन खड़े कर देते हैं, जबकि कई जगह रेहड़ी-पटरी वाले चाय और खाने की दुकानें लगाकर रास्ते पर कब्जा किए हुए हैं।
ऐसे में साइकिल चालकों के साथ-साथ मॉर्निंग वॉक करने वालों को भी इस ट्रैक का इस्तेमाल करने में परेशानी होती है। हैरानी की बात यह है कि यह रास्ता नोएडा अथॉरिटी से महज कुछ मीटर की दूरी पर है, फिर भी साइकिल ट्रैक की ऐसी स्थिति बनी हुई है।
क्यों नहीं होता इस्तेमाल?
मौके की तस्वीर और लोगों से बातचीत को जोड़कर देखें तो साइकिल ट्रैक के इस्तेमाल में सिर्फ एक समस्या नजर नहीं आती। पार्किंग से रास्ता बाधित होना, कुछ जगहों पर ट्रैक का संकरा होना और आगे जाकर इसकी कनेक्टिविटी खत्म होना जैसी बातें सामने आती हैं।
वहीं, मुख्य सड़क पर साइकिल सवारों की मौजूदगी यह बताती है कि इस रास्ते पर साइकिल से सफर करने वाले लोग हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या साइकिल ट्रैक उनकी जरूरत और यात्रा के हिसाब से बनाया गया है और क्या वह उन्हें एक सुरक्षित और लगातार रास्ता दे पा रहा है?
नोएडा अथॉरिटी ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर नोएडा अथॉरिटी का पक्ष जानने के लिए हमने कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन रिपोर्ट में शामिल करने लायक कोई स्पष्ट आधिकारिक जवाब नहीं मिल सका। सबसे पहले हमने नोएडा अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध संपर्क माध्यम के जरिए अथॉरिटी को ई-मेल भेजकर इस मामले पर जवाब मांगा। कई दिनों तक जवाब का इंतजार करने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अगर हमें इस ईमेल का जवाब आता है तो खबर में उसे शामिल करके अपडेट किया जाएगा।
ईमेल का जवाब ना मिलने के बाद हमने नोएडा अथॉरिटी के सेक्टर-96 स्थित कार्यालय जाकर जवाब तलाशने की कोशिश की। वहां मौजूद कुछ कर्मचारियों ने बताया कि सिविल से जुड़े काम सेक्टर-6 कार्यालय से देखे जाते हैं और हमें वहां जाने के लिए कहा गया। जब हम सेक्टर-6 पहुंचे तो वहां से हमें दोबारा सेक्टर-96 भेज दिया गया। वहां हमें बताया गया कि इस मामले में सत्य प्रकाश सिंह (एस.पी. सिंह), जीएम ही जवाब दे सकते हैं।
इसके बाद हम फिर सेक्टर-96 पहुंचे। वहां एक कर्मचारी ने हमें एस.पी. सिंह का मोबाइल नंबर दिया। जब हमने उनसे इस रिपोर्ट से जुड़े सवालों पर जवाब मांगा तो उन्होंने इस मामले में जवाब देने से इनकार करते हुए कपिल से बात करने को कहा।
हमने कपिल से संपर्क किया तो उनका कहना था कि वह मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं और इस मामले में जीएम एस.पी. सिंह ही जवाब दे सकते हैं।
इस तरह, नोएडा अथॉरिटी से जवाब लेने के लिए ई-मेल से लेकर कार्यालय तक कई बार संपर्क करने के बावजूद हमें इस मामले पर कोई स्पष्ट आधिकारिक जवाब नहीं मिल सका, जिसे रिपोर्ट में अथॉरिटी के पक्ष के तौर पर शामिल किया जा सके।
साइकिल वाले सत्ता से बाहर प्रशासन भी भूल गया?
दरअसल, यह प्रोजेक्ट अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था। ठीक वैसे ही जैसे कि लखनऊ में गोमती नदी का रीवर फ्रंट। सरकार बदलने के बाद प्राथमिकताएं बदलीं और सरकार के स्तर पर इसकी खोज-खबर न लिए जाने के चलते अधिकारी भी इसको लेकर ढीले पड़ते गए।
देखते ही देखते ये साइकिल ट्रैक खराब होते गए। रख-रखाव ना होने के चलते कई जगहों पर साइकिल ट्रैक टूट चुके हैं। कहीं अगर किसी काम के लिए साइकिल ट्रैक पर खुदाई हो गई तो उन्हें दोबारा नहीं बनाया गया। नतीजा यह है कि अब नोएडा में साइकिल चलाने वाले लोग तो हजारों की संख्या में हैं लेकिन उनके लिए अलग से बने रास्तों पर भी गाड़ी वालों का ही कब्जा है।
