उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने अब अन्य राज्यों में भी संगठन विस्तार की कवायद तेज कर दी है। शुक्रवार को लखनऊ स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश इकाइयों के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने और चुनावी तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बैठक में मायावती ने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क बढ़ाने और बहुजन समाज को संगठित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए समाज को एकजुट होकर BSP को मजबूत बनाना होगा। साथ ही लोगों को अपने वोट की सुरक्षा को आत्मसम्मान, अधिकार और सम्मान की सुरक्षा के बराबर महत्व देने के लिए जागरूक करने पर जोर दिया।
हिमाचल में अवसर ढूंढ रहीं है मायावती?
हिमाचल प्रदेश की समीक्षा के दौरान हालिया स्थानीय निकाय चुनावों के बाद बने राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि राज्य में कांग्रेस और बीजेपी दोनों के प्रति जनता में नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में बसपा के लिए खुद को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने का अवसर मौजूद है।
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जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठी
जम्मू-कश्मीर इकाई की बैठक में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पार्टी नेताओं ने कहा कि लंबे समय से लंबित यह मांग अब लोगों में निराशा और असंतोष का कारण बन रही है। उनका मानना है कि राज्य का दर्जा नहीं मिलने से विकास कार्यों, प्रशासनिक व्यवस्था और आम जनजीवन पर असर पड़ रहा है।
अंबेडकरवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का निर्देश
मायावती ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में बहुजन समाज आज भी गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और सामाजिक पिछड़ेपन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अंबेडकरवादी विचारधारा के आधार पर समाज को संगठित कर राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सक्रियता बढ़ाने को कहा।
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दोनों राज्यों में मजबूत आधार तलाश रही बसपा
बसपा को हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में एक सीट पर जीत मिली थी, लेकिन उसके बाद पार्टी का खाता नहीं खुल सका। वहीं जम्मू-कश्मीर में पार्टी 1996 से लगातार चुनाव लड़ रही है, लेकिन अब तक कोई सीट जीतने में सफल नहीं हुई है। ऐसे में आगामी चुनावों को देखते हुए बसपा दोनों राज्यों में संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी संगठनात्मक मजबूती पर जोर देकर मायावती राष्ट्रीय स्तर पर बसपा की मौजूदगी को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटी हैं।
