श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे के पैसे की चोरी के आरोपों ने पूरे देश में सनसनी मचा दी है। उत्तर प्रदेश में खासतौर से इसके बारे में चर्चा हो रही है। जब यह मामला खुला तो चढ़ावे के पैसे की चोरी 5-7.5 करोड़ रुपये का दावा किया गया था, लेकिन जांच बढ़ने के साथ आंकड़ा 200 करोड़ रुपये तक पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं। विपक्षी दलों ने इसे बड़ा घोटाला बताते हुए बीजेपी और योगी आदित्यनाथ सरकार के ऊपर बड़ा सियासी हमला बोला है। राम मंदिर की देखरेख करने वाले 'राम मंदिर ट्रस्ट' ने आंतरिक ऑडिट में किसी बड़ी अनियमितता से इनकार किया, लेकिन यूपी सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया।
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दल बीजेपी के ऊपर आरोप लगा रहे हैं कि भगवा पार्टी इस चोरी के खिलाफ कुछ नहीं बोल रही है और साथ ही योगी सरकार ट्रस्ट के मुख्य कर्ताधर्ता चंपत राय के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। सपा इस बात पर भी सवाल उठा रही है कि आखिर इतनी बड़ा चोरी हुई, जिससे राम भक्तों की आस्था से खिलवाड़ हुआ है तो इसमें अभी तक FIR क्यों नहीं लिखी गई।
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चंपत राय की भूमिका सवालों के घेरे में...
दरअसल, श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के महासचिव चंपत राय राम मंदिर आंदोलन के समय से ही सक्रिय रहे हैं। वह विश्व हिंदू परिषद में रहते हुए आंदोलन में शामिल हुए और 2020 में ट्रंस्ट की स्थापना होने के बाद एक तरह से राम मंदिर के कर्ताधर्ता बना दिए गए। मंदिर में वित्त से लेकर सुरक्षा तक की जिम्मेदारी उनके जिम्मे है। ऐसे में राम मंदिर से उनके करीबी ही करोड़ो रुपये लूटते रहे, पैसे लूटकर महीनों की सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दी गई। इतना सब होने के बाद भी चंपत राय खामोश रहे।
विपक्षी दल इन्हीं अनियमितताओं को लेकर बीजेपी के ऊपर हमला कर रहा है। राम मंदिर लोगों के लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बीजेपी और उसकी हिंदुत्ववादी राजनीति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। ऐसे में चंदे में गड़बड़ी और चोरी के आरोप बीजेपी और उसके सबसे बड़े नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही वजह है कि राम मंदिर चंदा चोरी के मामले पर भारतीय जनता पार्टी फूंक फूंक कर कदम रख रही। आइए जानते हैं कि बीजेपी ऐसा क्यों कर रही है...
विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा
बीजेपी इस पूरे प्रकरण को लेकर इतनी सावधानी से इसलिए चल रही है क्योंकि राम मंदिर उससे जुड़ा सबसे संवेदनशील राजनीतिक और धार्मिक मुद्दा है। इसलिए बीजेपी और सरकार दोनों जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाते हुए यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि राम मंदिर मामले में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी आरोप को नजरअंदाज न किया जाए। किसी भी मामले को नजरअंदाज करके बीजेपी अपने लिए खतरा मोल ले सकती है।
समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दल लगातार चोरी और योगी सरकार के कदमों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ही मंदिर में चोरी के मुद्दे को सबसे पहले उठाया था, जिसके बाद पैसों की चोरी की खबर पूरे देश में फैली। सपा आरोप लगा रही है कि दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं रही। ऐसे में बीजेपी किसी भी जल्दबाजी से बचना चाहती है।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी की कार्यशैली पर हमला करते हुए शुक्रवार को कहा कि बीजेपी की पूरे अयोध्या मंडल ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की राजनीति जमीन खिसक रही है। ऐसे में बीजेपी का सूपड़ा साफ होना तय है। उन्होंने आगे मांग करते हुए कहा, 'जनता कह रही है ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ नहीं ‘सोने का सोना, चांदी की चांदी’ करें। चढ़ाए गये पैसों, अनमोल शिलाओं के अलावा बहुमूल्य धातुओं और जेवरों का भी हिसाब देना ही पड़ेगा।'
जांच पर निष्पक्ष दिखाने की कोशिश
यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंदिर में चोरी की घटना की एसआईटी जांच शुरू करवाई है। एसआईटी रिकॉर्ड खंगाल रही है। इससे बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होगी, चाहे वे किसी भी स्तर पर हों। शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे सीएम योगी ने एक कार्यक्रम के मंच से कहा कि अगर कोई दोषी पाया जाएगा तो वह बच नहीं पाएगा, उसके ऊपर जरूर कार्रवाई होगी। वहीं, उन्होंने जनता से अपील की कि अगर किसी के पास चोरी से संबंधित सबूत होंतो तो उसे एसआईटी को सौंप दें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ही आरोप लगाया कि अयोध्या को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल सच्चाई सामने लाएगा।
लोगों की ट्रस्ट और सरकार दोनों पर नजरें
सोशल मीडिया के जामाने में राम मंदिर में हुई चोरी की घटना पूरे देश के लोगों तक पहुंच गई है। लोगों की नजरें ट्रस्ट, सरकार और विपक्ष सभी के ऊपर हैं। जनता जानना चाहती है कि आखिर मामले में नया क्या हो रहा है। ऐसे में निगरानी व्यवस्था में खामियों की बात खुद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने स्वीकार की है। इससे यह मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि प्रबंधन और जवाबदेही का भी बन गया है। इसके आलावा सीएम योगी समय-समय इस प्रकरण पर बयान दे रहे हैं। सीएम के अलावा चोरी के मामले पर कोई भी बीजेपी नेता या मंत्री बयान नहीं दे रहा है।
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यूपी चुनाव 2027 से पहले जोखिम का खतरा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर बीजेपी की बड़ी उपलब्धि रही है। यूपी में सरकार बनने से लेकर केंद्र में मोदी सरकार बनाने में इसी मंदिर का अहम योगदान रहा है। ऐसे में अलग, यह विवाद लंबा खिंचता है, तो इससे कई और गंभीर मामले खुल सकते हैं। यह ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें विपक्ष अपने हाथों से नहीं जाने देगा, बल्कि इसे जनता के बीच ले जाकर चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा। इसलिए समाजवादी पार्टी सहित कांग्रेस चाहती हैं कि इस मामले में जनता के बीच जितनी ज्यादा से ज्यादा बात पहुंचे उनके लिए उतना ही बेहतर होगा।
वहीं, यूपी सरकार जांच तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि बीजेपी को किसी भी तरह की राजनीतिक नुकसान कम से कम हो।


