बिहार के भागलपुर के एक अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर पुलिस ने छापा मारा है। पुलिस ने यहां से 5 संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। मामला भागलपुर के जोगसर थाना क्षेत्र के आदमपुर स्थित तपस्वी हॉस्पिटल का है। पुलिस के मुताबिक, अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर एक कमरे में कुछ लोग बैठकर साइबर अपराध की योजना बना रहे थे। इसकी सूचना मिलने के बाद एसएसपी प्रमोद कुमार ने जोगसर थाना पुलिस और डीआईयू को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद एसडीपीओ नगर हेमंत सिंह के नेतृत्व में टीम ने छापा मारा।
पुलिस जब अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर पहुंची तो एक कमरे में 5 युवक मिले। कमरे से 4 लैपटॉप, 7 मोबाइल फोन और 2 एप्पल आईपैड बिखरे थे जिसे मौके से पुलिस द्वारा बरामद किया गया। पुलिस को वहां से 7 एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक और दूसरे दस्तावेज भी मिले। इसके अलावा 15 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। पुलिस ने एक मोटरसाइकिल भी जब्त की है। पुलिस ने पांचों युवकों को गिरफ्तार कर लिया। बरामद सामान को भी कब्जे में ले लिया गया है। हालांकि अस्पताल में छापेमारी की खबर फैलते ही अफरा-तफरी मच गई। मरीज और उनके परिजन सकते में आ गए।
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साइबर ठगी से जुड़े होने का शक
पुलिस को शक है कि बरामद मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा था। वे लोगों को लोन दिलाने, नौकरी दिलाने, केवाईसी अपडेट कराने और लॉटरी लगने का झांसा देकर उनके खाते से पैसे उड़ाते थे। पुलिस को मोबाइल फोन और लैपटॉप में कई फर्जी एप्लिकेशन और साइबर ठगी से जुड़े चैट मिले हैं। पुलिस ने सभी मोबाइल और लैपटॉप को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे। उनके बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस मामले में और कितने लोग जुड़े हैं। पुलिस को शक है कि बरामद बैंक खाते और दूसरे दस्तावेज साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा सकते थे।
घटनास्थल से पुलिस को 15 जिंदा कारतूस भी मिले हैं। इससे यह शक जताया जा रहा है कि आरोपी केवल साइबर ठगी ही नहीं, बल्कि अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस जांच कर रही है कि ये कारतूस कहां से आए थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इनके पीछे किसी दूसरे अपराध का कनेक्शन तो नहीं है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। उनके मोबाइल और लैपटॉप की भी जांच की जा रही है।
अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर कैसे मिला कमरा?
इस मामले में अब एक बड़ा सवाल अस्पताल को लेकर भी है। आखिर अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर यह कमरा किन लोगों को दिया गया था? वे वहां कब से रह रहे थे? अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी थी या नहीं? स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर अक्सर बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था और देर रात तक लाइट जलती रहती थी। लोगों ने कई बार अस्पताल प्रबंधन से इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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अब 15 कारतूस की बरामदगी के बाद लोगों में डर भी है। लोग पूछ रहे हैं कि अस्पताल में हथियार और कारतूस क्या कर रहे थे। पुलिस अब इन सवालों के जवाब तलाश रही है। अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है। पांचवीं मंजिल पर आने-जाने वाले लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस अस्पताल के रजिस्टर और कमरे से जुड़े दस्तावेज भी देख सकती है। अस्पताल संचालक से भी पूछताछ की जा सकती है।
मास्टरमाइंड की तलाश
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड कौन है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। एसडीपीओ नगर हेमंत सिंह ने बताया कि पुलिस को मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई थी। पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कई सामान बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
