मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हाईलेवल समीक्षा बैठक हुई। इसमें राज्य की तीन बड़ी चुनौतियों बाढ़ प्रबंधन, सड़क कनेक्टिविटी और ऊर्जा पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में गंगा, गंडक और कोसी नदी परियोजना, बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, 2400 मेगावाट पीरपैंती थर्मल प्लांट और पीएम-कुसुम योजना से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं में तेजी लाने और उन्हें समय पर पूरा करने का निर्देश दिया।

 

बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव और पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने अपने-अपने विभागों की योजनाओं की जानकारी दी। कोसी नदी प्रणाली की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, 'कोसी एक गतिशील और आपस में जुड़ी हुई नदी प्रणाली है। इसके प्रबंधन को सिर्फ हर साल आने वाली बाढ़ के समय की कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसके लिए लंबे समय की बाढ़ प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी।'

 

यह भी पढ़ें: 'विपक्ष कमजोर है, जनता की आवाज नहीं उठा रहा', तेजस्वी पर भड़के साधू यादव

 

उन्होंने कहा, 'हर साल बाढ़ आती है, सरकार राहत देती है और अगले साल फिर वही स्थिति सामने आती है। इससे स्थायी समाधान नहीं निकलता।' उन्होंने कोसी क्षेत्र को लोगों, संपत्ति और सड़क संपर्क से जुड़े कई जिलों के एक बड़े नदी क्षेत्र के रूप में देखते हुए समग्र योजना बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, 'कोसी को सिर्फ एक नदी के तौर पर नहीं बल्कि पूरे उत्तर बिहार की लाइफलाइन के रूप में देखना होगा। इसके दोनों किनारों पर बसे जिलों को जोड़कर एक कॉरिडोर के रूप में विकसित करना होगा।'

तटबंधों पर लगाए जाएंगे सोलर प्लांट

मुख्यमंत्री ने कोसी में गाद प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने और नए बैराज के निर्माण की दिशा में जरूरी कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा, 'कोसी में सबसे बड़ी समस्या गाद की है। नेपाल से भारी मात्रा में गाद आती है और इससे नदी की तलहटी ऊंची हो जाती है। इससे पानी रखने की क्षमता घटती है और बाढ़ का खतरा बढ़ता है। गाद निकालने के लिए स्थायी नीति बनानी होगी। इससे नदी में पानी के बहाव और पानी रखने की क्षमता को बेहतर किया जा सकेगा।'

 

गंडक नदी से जुड़ी योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने तटबंधों पर सोलर प्लांट लगाने की दिशा में भी काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, 'गंडक और कोसी के तटबंधों पर खाली जमीन है। वहां सोलर प्लांट लगाए जा सकते हैं। इससे बिजली भी पैदा होगी और तटबंधों का इस्तेमाल भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। कोसी क्षेत्र के शुरुआती 100 किलोमीटर के विशेष डेंजर जोन में डबल शीट पाइलिंग की जरूरत है। यह सबसे ज्यादा कटाव वाला क्षेत्र है। हर साल यहां गांवों को नुकसान होता है। डबल शीट पाइलिंग से कटाव रोकने और लोगों को स्थायी राहत देने में मदद मिलेगी।'

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे में तेजी

पथ निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान बक्सर-भागलपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की प्रगति पर चर्चा हुई। इस परियोजना की कुल लंबाई 348.196 किलोमीटर है। इसमें 336.205 किलोमीटर हिस्सा बिहार और करीब 12 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। मुख्यमंत्री ने गंगा-अंबिका पथ, बिदुपुर-दिघवारा 6-लेन पुल, नारायणी पथ दरिहारा-डुमरिया घाट और विश्वामित्र पथ बक्सर-आरा-मनेर से जुड़ी परियोजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को इन परियोजनाओं में तेजी लाने और तय समय-सीमा का पालन करने का निर्देश दिया।

 

उन्होंने कहा, 'गंगा, कोसी और गंडक नदी को व्यवस्थित करना है। इनके दोनों तरफ तटबंधों को मजबूत करते हुए उन पर फोरलेन सड़क का निर्माण करना है। इससे बाढ़ के समय भी आवागमन में परेशानी नहीं होगी और तटबंधों की निगरानी भी आसान होगी। गंगा-अंबिका पथ और नारायणी पथ बनने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच दूरी कम होगी। वहीं विश्वामित्र पथ बनने से बक्सर से पटना आना आसान होगा। सड़कें विकास की रीढ़ हैं। जितनी अच्छी सड़कें होंगी उतनी तेजी से विकास होगा। इसलिए सभी सड़क परियोजनाओं की नियमित निगरानी हो और समय पर जमीन अधिग्रहण पूरा किया जाए।'

पीरपैंती और बांका पावर प्लांट की समीक्षा

ऊर्जा विभाग की समीक्षा के दौरान पीरपैंती तापीय विद्युत परियोजना की प्रगति पर चर्चा हुई। इस परियोजना की क्षमता 3x800 मेगावाट यानी कुल 2400 मेगावाट है। इसके साथ ही बांका तापीय विद्युत संयंत्र से जुड़े काम की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा, 'इन दोनों परियोजनाओं से बिहार में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी।' उन्होंने पीएम-कुसुम योजना के तहत कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के काम की भी जानकारी ली और इसे तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया।

 

उन्होंने कहा, 'कृषि क्षेत्र को पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली देने के साथ सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जरूरी है। कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने से किसानों को दिन में बिजली मिलेगी और बिजली कंपनी पर लोड भी कम होगा।' मुख्यमंत्री ने राजकीय नलकूपों को भी सौर ऊर्जा से चलाने की दिशा में तेजी से काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, 'अभी डीजल और बिजली से नलकूप चलाए जाते हैं जिससे खर्च ज्यादा आता है। सौर ऊर्जा से नलकूप चलाने पर खर्च कम होगा और किसानों को सस्ती दर पर पानी मिल सकेगा।'

 

यह भी पढ़ें: 'छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं, कानून का राज है', अशोक चौधरी के बयान पर मचा बवाल

हर महीने होगी परियोजनाओं की समीक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा, 'बाढ़ प्रबंधन के लिए स्थायी समाधान की दिशा में कार्ययोजना बनाकर काम करना है। गंगा, कोसी और गंडक नदियों को व्यवस्थित करना है। इनके दोनों तरफ तटबंधों को मजबूत करते हुए फोरलेन सड़क का निर्माण करना है। गंगा, कोसी और गंडक क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों को स्थायी राहत देने के साथ इस क्षेत्र को समृद्ध बनाना भी लक्ष्य है।'

 

मुख्यमंत्री ने कहा, 'बाढ़ को सिर्फ आपदा के रूप में नहीं देखना चाहिए। बाढ़ के पानी को जमा कर उसका इस्तेमाल सिंचाई और बिजली के लिए किया जा सकता है। कोसी और गंडक क्षेत्र में समृद्धि लानी है।' उन्होंने सभी संबंधित विभागों को परियोजनाओं की नियमित निगरानी, आपसी तालमेल और समय पर काम पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, 'इससे राज्य में जल संसाधन, सड़क कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र की आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी। हर हफ्ते मुख्य सचिव स्तर पर और हर महीने मुख्यमंत्री स्तर पर परियोजनाओं की समीक्षा होगी। किसी भी परियोजना में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'