नेपाल में आई अचानक फ्लैश फ्लड के कारण काठमांडू में फंसे महाराष्ट्र के करीब 100 तीर्थयात्रियों को बिहार सरकार ने सुरक्षित रेस्क्यू कर उनके गृह राज्य के लिए रवाना किया। महाराष्ट्र सरकार के अनुरोध पर बिहार सरकार ने यह कार्रवाई की। मुख्यमंत्री के निर्देश और मुख्य सचिव व आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव की निगरानी में आपदा प्रबंधन विभाग के समन्वय से सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। सभी तीर्थयात्रियों को नेपाल सीमा से सुरक्षित एस्कॉर्ट कर सीतामढ़ी लाया गया। इसके बाद उन्हें पटना लाकर विशेष ट्रेन से महाराष्ट्र रवाना किया गया।
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के करीब 100 तीर्थयात्री नेपाल के काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए थे। वहां अचानक फ्लैश फ्लड आ गई। भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया और कई सड़कें बंद हो गईं। इससे तीर्थयात्री काठमांडू में फंस गए। उन्हें खाने-पीने में भी परेशानी होने लगी। इसके बाद तीर्थयात्रियों ने महाराष्ट्र सरकार से संपर्क किया। महाराष्ट्र सरकार ने बिहार सरकार से अनुरोध किया कि नेपाल सीमा से सटे बिहार के रास्ते इन यात्रियों को सुरक्षित निकाला जाए।
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सीएम के निर्देश पर शुरू हुआ रेस्क्यू
महाराष्ट्र सरकार का अनुरोध मिलते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य सचिव और आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव से सभी तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बिहार लाने और उनके लिए जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करने को कहा। मुख्य सचिव ने सीतामढ़ी के जिलाधिकारी से बात कर पूरी व्यवस्था की।
आपदा प्रबंधन विभाग के समन्वय से सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने 28 अगस्त 2026 को सभी तीर्थयात्रियों को नेपाल सीमा से सुरक्षित एस्कॉर्ट कर सीतामढ़ी पहुंचाया। प्रशासन की टीम नेपाल बॉर्डर पर पहले से मौजूद थी। जैसे ही यात्री बॉर्डर पर पहुंचे उन्हें बसों से सीतामढ़ी लाया गया। यहां उनके लिए खाना, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई। मेडिकल टीम ने भी यात्रियों की जांच की। कई यात्री बुजुर्ग थे इसलिए उनका खास ध्यान रखा गया।
सीतामढ़ी के जिलाधिकारी ने बताया कि सभी यात्री काफी डरे हुए थे लेकिन बिहार प्रशासन को देखकर उन्हें राहत मिली। उन्हें खाना, पानी और आराम करने की सुविधा दी गई। इसके बाद उन्हें पटना भेजने की तैयारी की गई।
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पटना से ट्रेन से महाराष्ट्र रवाना
सभी तीर्थयात्रियों को 29 अगस्त को रात करीब 2:30 बजे सीतामढ़ी से बसों के जरिए पटना लाया गया। पटना जिला प्रशासन ने उन्हें ओपी साह सामुदायिक भवन में ठहराया। यहां रात में ही उनके खाने और रहने की व्यवस्था की गई। डॉक्टरों की टीम ने सभी यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की और सभी स्वस्थ पाए गए। पटना के जिलाधिकारी भी वहां पहुंचे और यात्रियों से मुलाकात की।
यात्रियों की संख्या को देखते हुए मुख्य सचिव स्तर से रेलवे बोर्ड से संपर्क किया गया। इसके बाद पटना-पूर्णा एक्सप्रेस में दो अतिरिक्त बोगियां जोड़ी गईं ताकि सभी यात्री आराम से अपने घर लौट सकें। 29 अगस्त को सुबह 7:30 बजे सभी तीर्थयात्रियों को ट्रेन से महाराष्ट्र के लिए रवाना कर दिया गया। पटना जंक्शन पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने यात्रियों को ट्रेन में बैठाया और उन्हें विदा किया।
सुरक्षित घर लौटने पर तीर्थयात्रियों ने बिहार सरकार, सीतामढ़ी और पटना जिला प्रशासन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि नेपाल में फंसने के बाद उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह वहां से कैसे निकलेंगे लेकिन बिहार सरकार ने उनकी काफी मदद की। यात्रियों ने खास तौर पर खाने, रहने और ट्रेन की व्यवस्था के लिए प्रशासन को धन्यवाद दिया। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री का निर्देश है कि संकट में फंसे लोगों की हर संभव मदद की जाए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के तीर्थयात्री बिहार सरकार के लिए मेहमान थे और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की थी। इस रेस्क्यू ऑपरेशन की महाराष्ट्र सरकार ने भी सराहना की।
