विदेश में डॉक्टर बनने का सपना दिखाकर लाखों की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। बिहार और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस गिरोह के मुख्य आरोपी को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि गिरोह के लोगों ने कार्डिफ विश्वविद्यालय में MBBS में एडमिशन, वीजा और पार्ट-टाइम नौकरी दिलाने के नाम पर बख्तियारपुर के एक परिवार से 3 लाख 85 हजार रुपये ठग लिए थे। उन्हें नकली एडमिशन लेटर भी थमा दिया गया। जब सच्चाई सामने आई तो उनके होश उड़ गए।
यह मामला बिहार के बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के रानीसराय गांव का है। यहां के रहने वाले रौशन कुमार अपनी पत्नी मेनका कुमारी को डॉक्टर बनाना चाहते थे। इसी दौरान मई 2025 में उनकी पहचान गाजियाबाद निवासी विवेक भटनागर से हुई। विवेक ने खुद को वेट इंटरप्राइजेज नाम की एजेंसी का संचालक बताया। उसने रौशन को भरोसा दिलाया कि करीब 9 लाख रुपये में उनकी पत्नी का ब्रिटेन के कार्डिफ विश्वविद्यालय में एडमिशन, वीजा और वहां पार्ट-टाइम नौकरी की व्यवस्था कराई जाएगी। विवेक के साथ अभिषेक वर्मा, रूपाली वर्मा और सूरज वर्मा भी इस एजेंसी से जुड़े थे। बातचीत के बाद रौशन ने एडवांस के तौर पर 3 लाख 85 हजार रुपये जमा कर दिए।
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आरोपियों ने कहा कि बाकी रकम वीजा और टिकट के समय देनी होगी। पैसे लेने के बाद गिरोह के लोगों ने मेनका कुमारी का ऑनलाइन इंटरव्यू भी कराया। कुछ दिनों बाद उन्होंने रौशन को एक एडमिशन सर्टिफिकेट दे दिया। उस कागज पर कार्डिफ विश्वविद्यालय का नाम और लोगो छपा था। इसे देखकर रौशन को पूरा यकीन हो गया कि उनकी पत्नी का एडमिशन हो चुका है। आरोपियों ने यह भी कहा कि वीजा की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही बुलावा आ जाएगा। तीन महीने तक परिवार इसी इंतजार में रहा।
ईमेल से खुली पोल, फिर दर्ज हुई FIR
जब काफी समय बीत गया और कोई अपडेट नहीं आया तो रौशन को शक हुआ। उन्होंने सीधे कार्डिफ विश्वविद्यालय को ईमेल भेजकर पूछा कि उनकी पत्नी का एडमिशन हुआ है या नहीं। यूनिवर्सिटी से जो जवाब आया, उसे पढ़कर रौशन के पैरों तले जमीन खिसक गई। विश्वविद्यालय ने साफ लिखा कि इस नाम का कोई एडमिशन प्रोसेस वहां नहीं हुआ है और न ही मेनका कुमारी किसी कोर्स में रजिस्टर्ड हैं। सच्चाई सामने आते ही रौशन ने बख्तियारपुर थाने में सभी चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर में कहा गया कि आरोपियों ने एग्रीमेंट भी किया था और चेक भी दिया था। एग्रीमेंट में लिखा था कि अगर एडमिशन नहीं होता तो 3.85 लाख रुपये वापस किए जाएंगे।
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एफआईआर दर्ज होने के बाद बख्तियारपुर पुलिस ने एसडीपीओ आयुष श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई। जांच में पता चला कि सभी आरोपी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं और ठगी के बाद से फरार हैं। बिहार पुलिस ने गाजियाबाद पुलिस से संपर्क किया। दोनों की संयुक्त छापेमारी में गाजियाबाद से मुख्य आरोपी विवेक भटनागर को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में विवेक ने अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है।
पुलिस को शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय है। इसका नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ है। आरोपियों ने पहले भी कई लोगों को विदेश में पढ़ाई और नौकरी के नाम पर इसी तरह ठगी का शिकार बनाया है।
कैसे करता था गिरोह काम?
पुलिस के मुताबिक, गिरोह पहले सोशल मीडिया और जान-पहचान के जरिए ऐसे लोगों को टारगेट करता था, जो अपने बच्चों को विदेश भेजना चाहते हैं। फिर उन्हें बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में एडमिशन और वीजा का झांसा दिया जाता था। रकम एडवांस में ली जाती थी और फर्जी दस्तावेज थमा दिए जाते थे। एडमिशन लेटर, इंटरव्यू और एग्रीमेंट, सब नकली होते थे। जब पीड़ित को शक होता तो आरोपी फोन बंद कर फरार हो जाते थे।
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फिलहाल पुलिस ने विवेक भटनागर को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है। उसके पास से कुछ फर्जी दस्तावेज और बैंक डिटेल भी बरामद हुई हैं। पुलिस अब गिरोह के बाकी तीन सदस्यों अभिषेक वर्मा, रूपाली वर्मा और सूरज वर्मा की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को शिकार बनाया है।
एसडीपीओ ने लोगों से अपील की है कि विदेश में पढ़ाई या नौकरी के नाम पर किसी भी एजेंसी पर आंख बंद करके भरोसा न करें। पहले विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी लें और किसी भी तरह के लेन-देन से पहले पुलिस या संबंधित दूतावास से संपर्क करें।
