बिहार के छपरा नगर निगम से रिश्वत देने का बड़ा मामला सामने आ रहा है। रिश्वत देने वाले की पहचान असगर अली अंसारी के रूप में हुई है। वह पेशे से एक टैक्स कलेक्टर है। फिलहाल असगर अली अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। असगर अली अंसारी ने कथित तौर पर नगर आयुक्त को दस हजार रुपए देने की कोशिश की। आरोपी ने यह पैसे एक पीले लिफाफे में रखे थे। नगर आयुक्त रिश्वत की पेशकश पर नाराज हो गए और तुरंत पुलिस को जानकारी दी। टैक्स कलेक्टर पर आरोप है कि उसने अपने पक्ष में रिपोर्ट बनाने के लिए नगर आयुक्त को रिश्वत देने की कोशिश की थी।
सदर एसडीपीओ राम पुकार सिंह ने मौके पर पहुंच कर टैक्स कलेक्टर को गिरफ्तार किया। टैक्स कलेक्टर पर भ्रष्टाचार के कई मामले कोर्ट में चल रहे हैं।
लिफाफा देखते ही कमिश्नर ने पुलिस को किया फोन
छपरा नगर निगम में दिन- दहाड़े हाईवोल्टेज ड्रामा हुआ। टैक्स कलेक्टर ने पीले लिफाफे में 10 हजार रुपये लेकर नगर आयुक्त के कार्यालय में पहुंचा था। वह अपने खिलाफ चल रही किसी जांच या कार्रवाई में अपने पक्ष में रिपोर्ट भेजने के लिए आयुक्त को रिश्वत देना चाहता था। लिफाफा टेबल पर रखते ही नगर आयुक्त भड़क गए। उन्होंने तुरंत लिफाफा लेने से इनकार कर दिया और नगर थाना पुलिस को फोन कर दिया।
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कुछ देर बाद ही नगर थाना की पुलिस नगर निगम कार्यालय पहुंच गई। पुलिस ने लिफाफे में रखे 10 हजार रुपये बरामद किए और टैक्स कलेक्टर को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। घटना के समय नगर निगम में मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। कई कर्मचारी कार्यालय से बाहर निकल आए और पूरे परिसर में इस गिरफ्तारी की चर्चा होने लगी। नगर निगम में इस तरह रिश्वत देने की हिम्मत पहली बार देखी गई है।
लिफाफे में मिले रुपये को आधार बनाकर होगी जांच
सदर एसडीपीओ ने कहा कि प्रारंभिक जांच में रिश्वत देने का मामला सही पाया गया है। नगर आयुक्त का बयान दर्ज किया गया है और लिफाफे में मिले रुपयों को केस प्रॉपर्टी बनाया गया है। केस प्रॉपर्टी वह दस्तावेज होता है जो पुलिस सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश करती है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि टैक्स कलेक्टर किस मामले में अपने पक्ष में रिपोर्ट चाहता था। उसके खिलाफ विभाग में पहले से कुछ शिकायतें थीं। उसी को लेकर वह आयुक्त पर दबाव बनाना चाहता था। नगर निगम प्रशासन ने भी इस मामले में विभागीय जांच शुरू करने की बात कही है। यदि आरोप सही पाए गए तो उसे निलंबित भी किया जा सकता है।
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छपरा नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। टैक्स कलेक्शन, होल्डिंग टैक्स, नक्शा पास करने और ट्रेड लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें आम हैं लेकिन इस तरह खुलेआम नगर आयुक्त को ही रिश्वत देने की कोशिश का मामला पहली बार सामने आया है। इस गिरफ्तारी के बाद नगर निगम के कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं ईमानदार छवि के कर्मचारियों ने इस कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि इससे नगर निगम में भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और ईमानदार लोगों का मनोबल बढ़ेगा। लोगों ने मांग की है कि नगर निगम में भ्रष्टाचार की पूरी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
नगर निगम में पहले भी लगे भ्रष्टाचार के आरोप
छपरा नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। टैक्स कलेक्शन, होल्डिंग टैक्स, नक्शा पास करने और ट्रेड लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें आम हैं। लेकिन इस तरह खुलेआम नगर आयुक्त को ही रिश्वत देने की कोशिश का मामला पहली बार सामने आया है। इस गिरफ्तारी के बाद नगर निगम के कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, ईमानदार छवि के कर्मचारियों ने इस कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि इससे नगर निगम में भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और ईमानदार लोगों का मनोबल बढ़ेगा। लोगों ने मांग की है कि नगर निगम में भ्रष्टाचार की पूरी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
