छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट इलाके में एक बहू ने अपनी 90 साल की सास को पीठ पर लादकर तीन किलोमीटर पैदल सफर तय किया ताकि वह अपनी रुकी हुई पेंशन बैंक से ले सकें। यह मामला 22 मई का है और इस घटना का वीडियो अगले ही दिन सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो गया।

 

सरगुजा जिले के जंगलपड़ा गांव की रहने वाली 50 साल से ज्यादा उम्र की सुखमनिया ने अपनी बुजुर्ग सास को अपनी पीठ पर उठाया। सुखमनिया ने किसी को भी बिना बताए यह फैसला लिया और अपनी सास को लेकर पैदल ही निकल पड़ीं। उनका सफर उनके गांव जंगलपाड़ा से शुरू होकर मैनपाट कस्बे में स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा तक था। यह पूरी दूरी लगभग तीन किलोमीटर की थी जिसे उन्होंने अपनी सास को पीठ पर लादकर पूरा किया।  

 

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पेंशन क्यों और कैसे बंद हुई?

सुखमनिया की सास को सरकार की ओर से हर महीने 500 रुपये की पेंशन मिलती है। पहले एक 'बैंक प्रतिनिधि' उनके घर आकर उन्हें 500 रुपये की मासिक पेंशन दे जाया करते थे। जनवरी महीने में आखिरी बार उन्हें पेंशन घर पर ही मिली थी। इसके बाद से पेंशन मिलनी बंद हो गई थी क्योंकि नो योर कस्टमर (KYC) का काम पूरा नहीं हो पाया था। केवाईसी के कागजात पूरे न होने की वजह से पिछले चार महीनों से पेंशन की राशि अटक गई थी।  

 

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बैंक में क्या हुआ?

22 मई को जब सुखमनिया अपनी सास को पीठ पर लादकर बैंक की शाखा पहुंचीं तब वहां मौजूद अधिकारियों ने उनकी मदद की। मैनपाट जनपद पंचायत की मुख्य कार्यकारी अधिकारी खुशबू शास्त्री ने बताया कि बैंक पहुंचने के बाद केवाईसी से जुड़ी सभी जरूरी औपचारिकताएं बैंक के अंदर पूरी की गई। जैसे ही ये प्रक्रिया पूरी हुई बैंक ने तुरंत ही पिछले चार महीने की रुकी हुई पूरी पेंशन यानी पूरे 2,000 रुपये की राशि जारी कर दी।