भारत में गर्मियों का मौसम आते ही हर घर में बस एक ही चर्चा शुरू हो जाती है और वह है फलों के राजा आम की। हमारे देश में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां गर्मियों के दिनों में आम के स्वाद की बात न होती हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में इस बात को सामने रखा है कि भारत में मिलने वाली आम की अलग-अलग किस्में हमारे देश की असली शान हैं। उन्होंने बताया कि किस तरह देश के अलग-अलग राज्यों के आमों की अपनी खूबी हैं और क्यों ये इतने खास हैं। जगह बदलने के साथ ही आम का रूप, रंग और स्वाद पूरी तरह बदल जाता है और यही विविधता हमारे देश को सबसे अलग बनाती है।
इस सफर में महाराष्ट्र और कोंकण का हापुस यानी अल्फांसो हो या गुजरात का केसर ये सभी आमरस की जान माने जाते हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश का दशहरी, हमारी काशी का लंगड़ा और बिहार का जर्दालु आम, जिसकी खुशबू को लोग दूर से ही पहचान लेते हैं। जब हम दक्षिण भारत की बात करते हैं तो वहां बंगनपल्ली, तोतापरी, नीलम और मालगोवा जैसे आमों का स्वाद मिलता है जबकि बंगाल का हिमसागर और ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरेखा आम अपनी मिठास देता है।
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अल्फांसो या हापुस
महाराष्ट्र के कोंकण इलाके से आने वाले अल्फांसो को आमों का राजा कहा जाता है। यह भारत के सबसे महंगे और मशहूर आमों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें रेशा बिल्कुल नहीं होता है। इसका चमकीला पीला रंग, तेज मिठास और बेहतरीन खुशबू हर किसी को पसंद आती है। इसके बिना गर्मियों में आमरस का मजा अधूरा रहता है।
केसर आम
गुजरात के जूनागढ़ और अहमदाबाद के इलाकों में होने वाला केसर आम अपनी खास खुशबू के लिए जाना जाता है। इसका नाम 'केसर' इसलिए है क्योंकि इसके अंदर का हिस्सा बिल्कुल असली केसर की तरह गहरा पीला और संतरी होता है। इस आम की खुशबू दूर से ही पहचानी जा सकती है और इसका स्वाद शहद की तरह मीठा होता है। लोग इसे भी आमरस बनाने के लिए बहुत खरीदते हैं।
दशहरी आम
उत्तर प्रदेश का दशहरी आम पूरी दुनिया में अपनी पतली गुठली और बेहद मीठे गूदे के लिए लोकप्रिय है। इसे भारत के सबसे पुराने और राजसी आमों में से एक माना जाता है। इसका छिलका बहुत पतला और हरा-पीला होता है। चूसकर खाने के लिए यह आम उत्तर भारत के लोगों की पहली पसंद है।
लंगड़ा आम
काशी का लंगड़ा आम उत्तर भारत के लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आता है। यह आम पकने के बाद भी बाहर से हरे रंग का ही दिखता है लेकिन अंदर से यह बहुत रसीला और मीठा होता है। इसकी खुशबू बेहद तेज होती है और इसका स्वाद सबको बचपन के दिनों की याद दिला देता है।
जर्दालु आम
बिहार का जर्दालु आम अपनी प्यारी खुशबू के लिए जाना जाता है जिसे लोग दूर से ही पहचान लेते हैं। इसका हल्का पीला रंग और खास मिठास इसे बाकी आमों से बिल्कुल अलग बनाती है। इस आम की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी बहुत ज्यादा है।
चौसा आम
बिहार और उत्तर भारत के इलाकों में पाया जाने वाला चौसा आम अपनी तेज मिठास और रस के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यह आम बाकी आमों के मुकाबले सीजन के थोड़े आखिरी दिनों में आता है। इसका छिलका चमकीला पीला होता है और इसका स्वाद बहुत ही लाजवाब होता है।
मालदा आम
बिहार का मालदा आम अपनी पतली त्वचा और बहुत ज्यादा गूदे के लिए पसंद किया जाता है। इसमें रेशा बिल्कुल नहीं होता जिसके कारण इसका इस्तेमाल चटनी, शेक और जूस बनाने में बहुत ज्यादा होता है। यह खाने में हल्का खट्टा-मीठा और बहुत रसीला होता है।
तोतापरी
दक्षिण भारत का यह आम अपने अलग आकार की वजह से आसानी से पहचान में आ जाता है। इसका नीचे का हिस्सा तोते की चोंच जैसा मुड़ा होता है इसलिए इसे तोतापरी कहते हैं। इसका छिलका थोड़ा मोटा होता है और यह स्वाद में बहुत ज्यादा मीठा नहीं होता। हल्का खट्टा होने की वजह से इसका इस्तेमाल सलाद, अचार और कमर्शियल मैंगो जूस बनाने में सबसे ज्यादा किया जाता है।
बंगनपल्ली
आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले से आने वाला यह आम आकार में काफी बड़ा और अंडाकार होता है। इसका छिलका बहुत चिकना और हल्के पीले रंग का होता है। बंगनपल्ली की खास बात यह है कि इसका छिलका भी खाया जा सकता है और इसमें बहुत अच्छी महक होती है। दक्षिण भारत के घरों में गर्मियों की शुरुआत इसी आम को खाकर होती है।
सुवर्णरेखा
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के इलाकों में मिलने वाला सुवर्णरेखा आम देखने में बहुत सुंदर होता है। इसके छिलके पर हल्के लाल और सुनहरे रंग की लाइनें दिखाई देती हैं जिसकी वजह से इसका नाम सुवर्णरेखा पड़ा है। यह आम स्वाद में बहुत मीठा और रसीला होता है। यह जल्दी खराब नहीं होता इसलिए इसे दूर-दूर के बाजारों में आसानी से भेजा जाता है।
नीलम आम
नीलम आम की खूबी यह है कि यह आकार में थोड़ा छोटा होता है और बाजारों में काफी लंबे समय तक देखने को मिल जाता है। वैसे तो यह गर्मियों में आता है लेकिन बारिश के मौसम में मिलने वाला नीलम आम सबसे ज्यादा स्वादिष्ट होता है। इसका स्वाद मीठे और खट्टे का एक बहुत बढ़िया मिक्स होता है।
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मालगोवा
दक्षिण भारत के सबसे अच्छे आमों में गिना जाने वाला मालगोवा आकार में काफी गोल और भारी होता है। इस एक आम का वजन काफी ज्यादा हो सकता है। हरे और पीले रंग की रंगत वाला यह आम अपने गाढ़े और मलाईदार गूदे के लिए मशहूर है जिसका स्वाद बहुत ही शानदार होता है।
हिमसागर
पश्चिम बंगाल का हिमसागर आम अपनी बढ़िया बनावट और तेज मिठास के लिए जाना जाता है। यह बाजार में बहुत कम समय के लिए आता है लेकिन लोग इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस आम के अंदर रेशा बिल्कुल नहीं होता जिससे मैंगो शेक और पारंपरिक बंगाली मिठाइयां बहुत स्वादिष्ट बनती हैं।
