मौसम बदलने के साथ ही इन्फ्लूएंजा (फ्लू), सर्दी-जुकाम, डेंगू, मलेरिया और पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से पैर पसारने लगती हैं। इस दौरान तापमान में बदलाव और हवा में नमी की वजह से वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। इस समय अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है।
सर्द-गर्म मौसम के कारण ज्यादातर लोग खांसी, जुकाम और बुखार की समस्या से जूझ रहे हैं। हमने इस बारे में कल्याण, फोर्टिस अस्पताल के चीफ इंटेस्टिव केयर स्पेशलिस्ट डॉक्टर संदीप पाटिल से बात की।
यह भी पढ़ें: चुकंदर से अनार तक में आयरन की मात्रा सबसे कम, फिर किन चीजों को खाएं?
लंबे समय तक वायरल फ्लू चलने के कारण
वायरल इन्फेक्शन हमेशा कुछ ही दिनों में ठीक नहीं होता। बुखार, नाक बंद होना, खांसी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण इन्फेक्शन कम होने के बाद भी कुछ समय तक बने रह सकते हैं। मौसम बदलने के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव और नमी में बदलाव से सांस संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षण साइनसाइटिस, निमोनिया या किसी दूसरी बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं। अगर बुखार लगातार बना रहे, ठीक होने के बाद दोबारा आ जाए या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।- डॉक्टर संदीप पाटिल
दवाई लेने के बाद आराम है लेकिन राहत नहीं?
डॉक्टर संदीप ने कहा, 'दवा लेने के बाद कुछ समय के लिए आराम मिलना जरूरी नहीं कि बीमारी पूरी तरह ठीक हो गई हो। पैरासिटामोल जैसी दवाएं बुखार और शरीर के दर्द को कम कर सकती हैं, जबकि नाक खोलने वाली दवाएं बंद नाक से राहत देती हैं। लेकिन ये दवाएं सीधे वायरस को खत्म नहीं करतीं। ठीक होने में इन्फेक्शन की गंभीरता, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और व्यक्ति की सेहत की अहम भूमिका होती है। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवाएं न लें और न ही एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये वायरल इन्फेक्शन का इलाज नहीं करतीं। अगर लक्षण बने रहें, बढ़ जाएं या दोबारा लौट आएं, तो डॉक्टर से सलाह लें।'
सेहत का ध्यान कैसे रखें?
मौसम में बदलाव के दौरान सांस से जुड़े इन्फेक्शन बढ़ सकते हैं, इसलिए रोजमर्रा की सावधानियां बरतना जरूरी है। नियमित रूप से हाथ धोएं, घर और आसपास हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था रखें और बीमार लोगों के नजदीकी संपर्क में आने से बचें। जब सांस संबंधी इन्फेक्शन फैल रहे हों, तो भीड़भाड़ वाली बंद जगहों पर मास्क पहनने पर विचार करें। पर्याप्त नींद लें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और अपनी सेहत के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधियां करें। लगातार बुखार, बढ़ती खांसी या सांस लेने में परेशानी को नजरअंदाज न करें। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से बीमारी की जटिलताओं का जल्दी पता लगाने और सही इलाज शुरू करने में मदद मिलती है।
यह भी पढ़ें: बॉडी क्लॉक से जुड़ा है यह नए तरीके का Circardian Depression, जानिए लक्षण
खान पान में क्या बदलाव करें ताकि बीमार न पड़ें?
संतुलित आहार शरीर की इम्यूनिटी को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है, हालांकि कोई एक चीज खाने से इन्फेक्शन से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं देता। अपने आहार में मौसमी फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, मेवे और अंडे, दूध या अन्य दालों से मिलने वाला पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें। पर्याप्त पानी पिएं और ताजा, साफ-सुथरा बना हुआ खाना खाएं। विटामिन C, जिंक और अन्य जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं। हालांकि, बिना जरूरत सप्लीमेंट्स न लें। ज्यादा प्रोसेस्ड वाली चीजें खाने से बचें और डॉक्टर के इलाज के बजाय ऐसे घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें, जिनके फायदे वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुए हैं।
