बिहार के जमुई जिले में अवैध बालू कारोबार और उससे जुड़े भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए झाझा थाना में पदस्थापित सरकारी चालक जितेंद्र कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। 12 हजार रुपये घूस के साथ हुई इस गिरफ्तारी ने न केवल झाझा थाना बल्कि पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को जिले में लंबे समय से चल रहे अवैध बालू कारोबार पर अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।

 

जानकारी के अनुसार, झाझा क्षेत्र में अवैध बालू के उठाव और परिवहन का कारोबार लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। आरोप है कि इस कारोबार को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए अवैध वसूली का एक समानांतर तंत्र काम कर रहा था। इसी कड़ी में झाझा थाना के सरकारी चालक जितेंद्र कुमार का नाम सामने आया। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि वह बालू ढोने वाले ट्रैक्टर चालकों और कारोबारियों से सुविधा शुल्क की मांग करता था और कार्रवाई से बचाने के नाम पर नियमित रूप से पैसे वसूलता था।

 

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बताया जाता है कि प्रति ट्रैक्टर प्रतिदिन तीन हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही थी। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद निगरानी विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और गोपनीय जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद निगरानी अधिकारियों ने पूरी 


रणनीति तैयार करके जाल बिछाया

योजना के तहत शिकायतकर्ता के माध्यम से आरोपी चालक को रिश्वत की राशि देने की व्यवस्था की गई। जैसे ही चालक ने 12 हजार रुपये की घूस ली, पहले से मौजूद निगरानी टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से पूरी राशि बरामद कर ली गई। कार्रवाई इतनी त्वरित थी कि आरोपी को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

 

गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम आरोपी को अपने साथ लेकर चली गई, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अवैध वसूली का यह खेल केवल एक व्यक्ति तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। सूत्रों की मानें तो पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

 

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अधिकारियों में खामोशी

इधर, मामले में झाझा थाना के कुछ अन्य कर्मियों तथा थाना प्रभारी की संभावित भूमिका को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि, अब तक किसी अधिकारी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। निगरानी विभाग का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी तथा जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

इस कार्रवाई के बाद जिले में अवैध बालू कारोबार से जुड़े लोगों के बीच भी बेचैनी बढ़ गई है। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि निगरानी विभाग की इस सख्त कार्रवाई से भ्रष्टाचार में संलिप्त तत्वों को स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग कर अवैध कमाई करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल पूरे मामले पर जिले की निगाहें टिकी हैं। निगरानी विभाग की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे अवैध बालू कारोबार और उससे जुड़े कथित संरक्षण तंत्र की कई परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है।