दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता दुर्गेश पाठक ने अब दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस की कानूनी कार्यवाही में शामिल होने का फैसला किया है। तीनों ने यह फैसला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खुद इस मामले की सुनवाई से अलग कर लेने के बाद लिया है। यह मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस मनोज जैन की बेंच के सामने है।
जस्टिस मनोज जैन ने देखा कि तीनों AAP नेताओं की तरफ से तीन 'वकालतनामा' दाखिल किए गए हैं। वकालतनामा एक जरूरी दस्तावेज होता है जिसके जरिए कोई व्यक्ति अपना पक्ष रखने के लिए वकील को अधिकार देता है। ये तीनों नेता पहले इस केस की सुनवाई में हिस्सा नहीं ले रहे थे और कोर्ट में अपना कोई वकील पेश नहीं कर रहे थे लेकिन अब इन्होंने कोर्ट की कानूनी प्रक्रिया में हिस्सा लेने का बड़ा फैसला लिया है।
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16 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई के लिए तय की है। कोर्ट में उस दिन वकील काम पर नहीं थे इसलिए कार्यवाही को आगे के लिए बढ़ा दिया गया ताकि वकीलों को अपनी तैयारी करने का पूरा मौका मिल सके। जस्टिस मनोज जैन ने अपनी राय देते हुए कहा कि अगर वकालतनामा जमा हो गया है तो अगली तारीख पर यह तय किया जा सकता है कि आगे किस तरह से सुनवाई होगी और पूरे मामले का शेड्यूल क्या रहेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला सीबीआई द्वारा दायर की गई उस याचिका से जुड़ा है जिसमें ट्रायल कोर्ट के 27 फरवरी के फैसले को चुनौती दी गई है। 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 दूसरे लोगों को इस केस से आरोपमुक्त कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह केस कानूनी जांच में सही साबित नहीं होता और अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो चुका है।
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इसके बाद सीबीआई ने हाई कोर्ट में अपील की और 9 मार्च को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें ट्रायल कोर्ट ने एक्साइज केस की जांच करने वाले अफसर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कही थी। हाई कोर्ट ने इस मामले में सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया था। उस समय सुनवाई करते हुए जस्टिस शर्मा ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने जो बातें कही थीं वह पहली नजर में गलत लगती हैं और उनकी गहराई से जांच की जानी चाहिए।
