पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से नाम कटने के विवाद पर फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए निर्देश दिया है कि जिन नागरिकों के नाम विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान हटा दिए गए थे, उन्हें अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) के फैसले के आधार पर वोट डालने का मौका दिया जाए।
न्यायालय ने चुनाव आयोग (ECI) को साफ आदेश दिया है कि वह न्यायाधिकरण द्वारा मंजूर की गई अपीलों को तुरंत प्रभावी बनाए। इस फैसले से उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण जगी है, जिनके मताधिकार पर संशय बना हुआ था। कोर्ट ने साफ किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हर पात्र नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की तकनीकी देरी आड़े नहीं आनी चाहिए।
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किसे मिलेगा वोट डालने का मौका?
सुप्रीम कोर्ट ने वोटिंग के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी है। आदेश के मुताबिक, जिन व्यक्तियों की अपील को अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्वीकार कर लिया है, वह 23 अप्रैल को होने वाले चरण में मतदान कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, जिन अपीलों का निपटारा 21 अप्रैल या 27 अप्रैल तक हो जाएगा, उन्हें भी उनके संबंधित मतदान केंद्रों पर वोट डालने की अनुमति होगी। कोर्ट ने केवल अपील 'लंबित' होने के आधार पर वोट देने की मांग को खारिज कर दिया है।
चुनाव आयोग जारी करेगा सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट
अदालत ने चुनाव आयोग को उन सभी मतदाताओं के लिए एक पूरक (Supplementary) संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया है जिनकी अपील मंजूर हुई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदान के दिन किसी भी योग्य वोटर को लिस्ट में नाम न होने के कारण केंद्र से वापस न भेजा जाए। बता दें कि इस प्रक्रिया के लिए बंगाल के अलावा ओडिशा और झारखंड के भी लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया है। जो 60 लाख से अधिक आपत्तियों का निपटारा कर रहे हैं।
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न्यायालय ने चुनावी प्रक्रिया में लगे अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि न्यायिक अधिकारियों को दिया गया सुरक्षा घेरा चुनाव संपन्न होने तक जारी रहेगा। मालदा जिले में अधिकारियों के घेराव की घटना पर चिंता जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले को उसके 'तार्किक अंत' तक ले जाया जाएगा। कोर्ट ने NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों के राजनीतिक बैकग्राउंड की जानकारी भी मांगी है, ताकि चुनावी ड्यूटी कर रहे अधिकारियों का मनोबल बना रहे।
