भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल रविवार को खेला जाना है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में टीम इंडिया अपने टाइटल को डिफेंड करने उतरेगी। रोहित शर्मा की कप्तानी में पिछले टी20 वर्ल्ड कप के खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम साउथ अफ्रीका को हराकर चैंपियन बनी थी। अब उसके पास लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाने वाली पहली टीम बनने का मौका है।

 

टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव के करियर का यह सबसे बड़ा दिन हो सकता है लेकिन उन्होंने अपने मजाकिया अंदाज को नहीं छोड़ा। फाइनल से पहले हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्या से जब पूछा गया कि क्या रोहित शर्मा की जगह भरना मुश्किल है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, 'सर, जूते मेरे हैं, मैं सिर्फ उनके कदमों पर चल रहा हूं।'

 

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रोहित से काफी कुछ सीखा - सूर्या

सूर्या ने आगे गंभीरता से सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने रोहित की कप्तानी से काफी कुछ सीखा है। भारतीय कप्तान ने कहा, 'जब मैं उनके साथ खेल रहा था तब उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। इसलिए मैंने वही रणनीति और वही मूल सिद्धांत अपनाने की कोशिश की। मैंने इसमें अपने तरीके को जोड़ने की कोशिश की और यह काफी कारगर रहा है।'

फाइनल में होगा दबाव

 

सूर्यकुमार ने माना कि फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में दबाव होना नेचुरल है। उन्होंने कहा, 'कप्तान के तौर पर मुझ पर दबाव जरूर होगा लेकिन उतना ही उत्साह भी है, क्योंकि वर्ल्ड कप फाइनल खेलने का मौका बार-बार नहीं मिलता, वह भी भारत में।' न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप का यह फाइनल सूर्य के लिए पिछले दो साल की जर्नी का रिजल्ट है। 

 

उन्होंने कहा, 'हम इस मंच के लिए काफी समय से तैयारी कर रहे हैं। यह सफर दो साल पहले शुरू हुआ था और अब फिर उसी स्टेडियम में लौट आए हैं, जहां 2023 में हमने इसे छोड़ा था। उम्मीद है कि हम अच्छा क्रिकेट खेलेंगे और मुश्किल हालात में भी साहस दिखाएंगे।'

 

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टीम के माहौल पर क्या बोले सूर्या?

ड्रेसिंग रूम के माहौल और युवा खिलाड़ियों को दी जाने वाली सलाह के बारे में पूछे जाने पर सूर्या ने मजाकिया अंदाज में कहा, 'वे मुझे ड्रेसिंग रूम में ज्यादा बोलने ही नहीं देते। वे अपनी शर्तों पर चलते हैं। मैंने देखा है कि जब उन्हें आजादी मिलती है तो मैदान पर उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग नजर आता है।' 

 

उन्होंने कहा, 'कप्तानी के 5-6 महीने बाद मैं इस टीम से पूरी तरह जुड़ पाया। तब समझ आया कि बड़े भाई या पिता जैसा बनने का कोई मतलब नहीं है। आपको उन्हें खुला छोड़ना होगा। तभी आप उनसे बेस्ट प्रदर्शन हासिल कर सकते हैं।' 

 

सूर्या के अनुसार टीम एक गुलदस्ते की तरह है, जिसमें हर फूल की अपनी अलग खूबसूरती और जगह होती है। उन्होंने हंसते हुए कहा, 'हर खिलाड़ी की अपनी क्षमता और ताकत होती है। ऐसा नहीं है कि मैंने किसी से कुछ कहा ही नहीं। मैंने खिलाड़ियों से बात की है। लेकिन जो यह महसूस करते हैं कि मैंने उन्हें छूट दी है, उनकी संख्या अब पहले से ज्यादा हो गई है। अब मैं ज्यादा दखल नहीं देता।'