22 दिनों बाद, अब जंतर-मंतर में आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट हो चुके हैं। उनकी जगह अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का एलान किया है। उनके हाथों में सोनम वांगचुक की तस्वीर है, लोगों से घिरे हैं और दावा कर रहे हैं कि सरकार उन्हें गिरफ्तार कर रही है। 

दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल जबरन उठा ले गई थी। वह पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। उनके जाने के बाद कोकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आमरण अनशन का संकल्प लिया।

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'सोनम वांगचुक को अपराधी की तरह ले गई पुलिस'

अभिजीत दीपके का दावा है कि पुलिस उन्हें भी घसीटकर ले गई थी और पीटा था। दीपके ने अब अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा कर दी। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सोनम वांगचुक को अपराधी की तरह उठाकर ले जाया गया।

'धर्मेंद्र प्रधान नहीं, सोनम वांगचुक पर सख्ती दिखा रहे PM'

अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की बजाय सरकार सोनम वांगचुक को उठा ले गई। उन्होंने NEET पेपर लीक में मारे गए 20 से ज्यादा छात्रों की मौत के लिए भी मोदी को जिम्मेदार ठहराया।

विपक्ष का रुख किधर है?

सोनम वांगचुक को हटाए जाने पर विपक्षी पार्टियों ने एकजुट होकर सरकार की आलोचना की। राहुल गांधी , अरविंद केजरीवाल , ममता बनर्जी , शरद पवार, अखिलेश यादव , आदित्य ठाकरे समेत कई नेताओं ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।

राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार की मूल भावना असत्य और हिंसा है। उन्होंने पेपर लीक, महंगी शिक्षा और छात्र आत्महत्याओं जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की निंदा की।

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सरकार क्या कह रही है?

भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के कारण दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। बीजेपी ने विपक्ष पर राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगा रही है।

20 जुलाई के संसद मार्च का क्या होगा?

अभिजीत दीपके ने कहा कि 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च निकाला जाएगा। प्रदर्शन जारी रहेगा। जंतर मंतर पर अब सोनम वांगचुक की तस्वीर रखी गई है। कार्यकर्ता उनका समर्थन कर रहे हैं। यह मुद्दा सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में हंगामे की वजह बनने वाला है।